बहुत ही अहम मेरठ से दिल्ली के बीच प्रस्तावित आरआरटीएस (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम) पर अब नई राह खुल सकती है। यूपी गेट से लेकर परतापुर तक की 52 किमी सड़क का अधिकार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से समाप्त होने के बाद अब गेंद प्रदेश सरकार के पाले में है।
एनएचएआई की प्रबल आपत्ति इस रोड पर रैपिड ट्रेन चलाने को लेकर थी। लेकिन अब यह रोड पीडब्लूडी की है। प्रदेश सरकार और मेरठ कमिश्नर ने भी नए सिरे से इसका प्रजेंटेशन तैयार करना शुरू कर दिया है। क्योंकि इसी माह दिल्ली में इस संबंध में अहम बैठक होने की बात कही जा रही है।
मेरठ से दिल्ली के बीच रैपिड ट्रेन चलाने की अर्से से कवायद चल रही है। इस संबंध में कई बार प्रस्ताव में परिवर्तन की बात कही। दरअसल नेशनल हाईवे-58 पर इस रोड का एलाइनमेंट तैयार किया गया तो राष्ट्रीय राज्यमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस पर अड़ंगा लगा दिया। अधिकारी इसके लिए तैयार ही नहीं थे कि एनएच-58 के ऊपर से ट्रेन चले। इसके बाद प्रस्तावित हुआ कि अंडर ग्राउंड ट्रेन चलाई जाए पर मोदीनगर और मुरादनगर में अंडरग्राउंड ट्रेन से इंकार किया गया है।
नारायण समिति ने बनाया था प्लान
इसके लिए भारत सरकार ने यूपी के पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। उनके साथ 22 जून 2015 को एनसीआर कमिश्नर कुश वर्मा, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड सचिव बीके त्रिपाठी, चीफ रीजनल प्लानर एनसीआर राजीव मल्होत्रा, मंडलायुक्त आलोक सिन्हा और नोडल अधिकारी विवेक भास्कर ने आरआरटीएस कॉरिडोर का दौरा कर रिपोर्ट दी थी। जिसके अनुसार भले ही पूरा ट्रैक अंडरग्राउंड ही रहे, पर मुरादनगर और मोदीनगर में एनएच-58 पर इसे एलीवेटिड ही रखना होगा। सघन आबादी यहां इतनी ज्यादा है कि बिना एलीवेटिड ट्रैक काम नहीं चलेगा।
मुरादनगर में तीन मोदीनगर में पांच
समिति ने सुझाव दिया कि तीन किमी मुरादनगर में तथा पांच किमी ट्रैक मोदीनगर में एलीवेटिड ट्रैक रहेगा। यदि शहर में भीतर ट्रेन जाएगी तो मेट्रो के हिसाब से इसे प्रस्तावित किया जाएगा। कहीं मेट्रो से नीचे रैपिड अंडरग्राउंड दौड़ेगी तो कहीं अंडरग्राउंड ही मेट्रो के बराबर बराबर चलाया जाएगा। यह रिपोर्ट केंद्र को दी गई थी। हालांकि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के नुमाइंदे बाद में यह अड़ंगा लगाने लगे कि उनकी बात सही तरीके से नहीं सुनी गई।
अब प्रदेश सरकार करेगी हस्तक्षेप
अब ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं कि प्रदेश सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करने जा रही है। दरअसल, एनएच- 58 पर यूपी गेट से परतापुर के हिस्से को एनएचएआई ने छोड़ दिया है। इस जिद से कि वह यहां आरआरटीएस नहीं चलने देगा। ऐसे में अब इस पर पीडब्लूडी यानी उत्तर प्रदेश सरकार का अधिकार है। सरकार तो चाहती है कि आरआरटीएस चले। अब तो उसका अधिकार है और उसे इस रोड के ऊपर या नीचे रोड चलाने में कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे में जल्द ही सरकार इस मामले को उठाने जा रही है। इधर, कमिश्नर आलोक सिन्हा खुद इस बाबत भारत सरकार को पत्र भेज रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसी माह दिल्ली में इसके लिए बैठक होने जा रही है जिसमें अहम फैसला हो सकता है।
यातायात व्यवस्था बड़ी चुनौती
मेरठ-दिल्ली के बीच करीब डेढ़ से दो लाख लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में यदि यहां काम शुरू हुआ तो ट्रैफिक का क्या डायवर्जन होगा, यह एक बड़ी चुनौती है। दिल्ली एक्सप्रेस वे भी तत्काल शुरू नहीं हो रहा है। यदि वह पहले बन जाता तो रैपिड ट्रेन पर काम आसान होता। ऐसे में गंगनहर की पटरी पर ट्रैफिक डायवर्ट करने का प्लान है। मुरादनगर से ही रूट डायवर्जन का चार्ट बनाया गया है। हालांकि इससे मोदीनगर और मुरादनगर से तो बचा जा सकता है। लेकिन बाकी रोड के लिए अभी और प्लानिंग तैयार करनी होगी।
यह है रैपिड ट्रेन का प्रोजेक्ट
- कुल 52 किमी का है ट्रैक
- कुल आठ किमी रहेगा एलीवेटिड, बाकी अंडर ग्राउंड
- सराय काले खां से आनंद विहार तक ट्रैक सुरंग से जोड़ा जाएगा।
- पड़पड़गंज, नोएडा लिंक रोड, अक्षरधाम, खेलगांव यमुना के भीतर से गुजरेगी
- दूसरे चरण में डीपीआर के तहत दिल्ली से 11 किमी लंबा भूमिगत मार्ग रहेगा
- दिल्ली में पूरा अंडरग्राउंड सेक्शन
- हुगली नदी की तर्ज पर यमुना के नीचे से टनल का प्लान
- मुरादनगर बाजार में तीन किमी एलीवेटिड
- मोदीनगर बाजार में पांच किमी तक एलीवेटिड
यह है वर्क शेड्यूल
सराय काले खां से आनंद विहार - प्रथम फेज
आनंद विहार से परतापुर - द्वितीय फेज
परतापुर से दौराला - तृतीय फेज