अंदेशा पहले मोईन की हत्या की गई फिर उसके परिवार की
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पत्थर काटने वाली मशीन से परिवार के पांचों लोगों का गला काटा गया है। मौके पर खून से सनी पत्थर काटने वाली मशीन मिली। फॉरेंसिक टीम ने मशीन को कब्जे में ले लिया है। अंदेशा जताया गया कि बदमाशों ने पहले मोईनुद्दीन की हत्या की और उसके बाद परिवार को मार डाला। ऐसे में सवाल ये सवाल उठ रहा है कि पूरे परिवार को मारने वालों में कोई खास व्यक्ति रहा होगा, जिसका घर में आना जाना था।
परिजनों की आपबीती
वारदात का पता तब चला जब, मोईन के भाई तसलीम और मोमिन मौके पर पहुंचे। घर का दरवाजा बाहर से बंद था। तसलीम का कहना है कि मुझे अपनी पत्नी को अस्पताल लेकर जाना था। डॉक्टर को दिखाने के बाद मैं शाम को मोईन के घर पहुंचा। वहीं, हापुड़ में रहने वाला आसमा का भाई शफीक भी देर रात बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। पहले पति से उसकी कोई औलाद नहीं थी। बहन बहनोई और बच्चों के जाने का गम पहाड़ की तरह शफीक पर टूट रहा था। मौके पर मौजूद लोग हमदर्दी लिए उसे ढांढस बंधा रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने क्राइम सीन भी रीक्रिएट किया है। आसपास के लोगों से पुलिस ने जानकारी जुटाई कि आखिर मोईनुद्दीन और उसका परिवार आखिरी बार कब देखा था। पुलिस के पहुंचने से पहले तसलीम और मोमिन ने अपने भाई, भाभी और तीनों भतीजियों के शव देख थे।
यह है मामला
मेरठ में दंपती और उनकी तीन बेटियों की गला काटकर हत्या कर दी गई। राजमिस्त्री मोइनुद्दीन (52), पत्नी आसमां (45) और तीन बेटियों अस्सा (8), अजीजा (4) और अबीबा (1) के शव बृहस्पतिवार रात घर में डबल बेड के दोनों बॉक्सों में गठरी में बंधे मिले। वारदात लिसाड़ीगेट के सुहेल गार्डन में हुई। पुलिस ने मकान सील कर दिया है। फोरेंसिक टीम जांच कर रही है। देर रात तक हत्यारों की तलाश की जा रही थी। एसएसपी विपिन ताडा के अनुसार, मोइनुद्दीन करीब डेढ़ महीने पहले परिवार के साथ सुहेल गार्डन आए और किराये के मकान में रहने लगे।
वहीं बगल में प्लॉट खरीदकर वह अपने मकान का निर्माण करा रहे थे। दो दिन से निर्माणाधीन मकान पर मोइनुद्दीन और उसके परिवार का कोई सदस्य दिखाई नहीं दिया, तो आसपास के लोगों में परिवार के लापता होने की चर्चा शुरू हो गई। बृहस्पतिवार रात 9:30 बजे पड़ोसी इमरान ने मोइनुद्दीन के किराये वाले घर में घुसकर देखा तो पांचों के शव पड़े हुए थे। उसने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर एडीजी मेरठ जोन डीके ठाकुर, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी विपिन ताडा पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और देर रात तक छानबीन करते रहे।
मोईन की तीसरी पत्नी थी आसमा
पुलिस के अनुसार, मोईन की तीन शादी हुई थीं। करीब 15 साल पहले उसने पहली शादी जफरा नाम की लड़की से की। एक बेटी इलमा को जन्म देने के बाद जफरा की मौत हो गई। वह बीमार रहती थी। फिलहाल बेटी अपनी बुआ के साथ किठौर में रहती है। दूसरी शादी 11 साल पहले मोईन ने नारा से की, लेकिन आए दिन के झगड़ों के बाद उसका तलाक हो गया। फिर मोईन ने आसमा से शादी की। आसमा पहले से शादीशुदा थी। उसकी पहली शादी शाहजहां कॉलोनी निवासी दीन मोहम्मद से हुई थी। मोईन और आसमा के तीन बेटियां हुईं।
परिवार का विवाद तो नहीं
मोईन सात भाइयों में तीसरे नंबर का था। मोईन के सलीम, अनीस, कलीम, तसलीम, मोमिन, अमजद भाई हैं। एक मामले में अमजद हरिद्वार जेल में बंद होना बताया गया है। पुलिस के मुताबिक मोईन के साले हापुड़ निवासी शफीक ने बताया कि एक सप्ताह पहले चार लाख रुपये मोर्डन ने अपने भाई की जमानत के लिए दिए थे। मोईन की आसमा तीसरी पत्नी थी, जबकि असमा ने भी अपने पहले पत्ति दीन मोहम्मद को तलाक देकर मोईन से निकाह किया था। परिवार के विवाद की भी पुलिस जानकारी जुटाने में लगी है।
लाशों को ठिकाने लगाने की योजना तो नहीं थी
मकान के अंदर मोईन का शव गठरी में बंधा था। पत्नी आसमा और बड़ी बेटी का शव बेड के अंदर था। दोनों छोटी बेटियों के शवों को भी बोरी में बांधकर बेड के अंदर ही रखा था। जिस मकान में सामूहिक हत्याकांड हुआ। उसके सामने वाला मकान भी बंद है और उसके आसपास दोनों ओर खाली प्लॉट हैं।
कई लोगों ने दिया हत्याकांड को अंजाम
घटनास्थल का मंजर देखकर पुलिस का मानना है कि इस हत्याकांड में कई लोग शामिल हो सकते हैं। एसएसपी का भी कहना है कि हत्याकांड को करीबी लोगों ने ही अंजाम दिया है, कातिल कौन है और कत्ल की वजह किया है, इसकी जांच की जा रही है।
पत्थर काटने की मशीन से गला रेता
- पुलिस के अनुसार, पांचों का गला पत्थर काटने वाली मशीन से काटा गया है। मौके पर खून से सनी मशीन भी मिली है। फोरेसिंक टीम ने मशीन को कब्जे में ले लिया है। अंदेशा जताया गया कि बदमाशों ने पहले मोइनुद्दीन की हत्या की और उसके बाद परिवार को मार डाला।
- कातिलों ने हत्या के बाद मोइनुद्दीन के शव को गठरी में बांधकर बेड के पास रखा। पत्नी और बड़ी बेटी को प्लास्टिक के कट्टे में लपेटकर बेड के बॉक्स में डाला हुआ था। दो बच्ची के शव बोरे में बांधकर बेड के दूसरे बॉक्स में रखे थे।