किरन के पिता लालाराम को मजबूरी में बाजार से इन्फ्यूजन सेट खरीदकर लाना पड़ा। गंभीर लापरवाही तब देखने को मिली जब नर्स ने बिना ग्लव्स पहने और बिना सेनिटाइजेशन के ही मरीज को खून चढ़ा दिया। इस तरह की लापरवाही से मरीज को संक्रमण (इंफेक्शन) और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति, इलाज में टालमटोल
लावारिस वार्ड में भर्ती पीर वाली गली निवासी 25 वर्षीय फिरोजा के मामले में भी अस्पताल का ढुलमुल रवैया सामने आया है। फिरोजा के देवर मोहम्मद सोहेल ने बताया कि पहले मरीज को खून चढ़ाने की बात कही गई लेकिन बाद में केवल आयरन की दवा लिखकर छोड़ दिया गया। सोहेल का आरोप है कि मरीज की ब्लड जांच के लिए सैंपल तक नहीं लिया गया और इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
लू से पीड़ित मरीजों के लिए एसी की व्यवस्था तक नहीं
भीषण गर्मी और हीट वेव को देखते हुए अस्पताल में बेड तो आरक्षित कर दिए गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। आरक्षित वार्ड में न तो एसी की व्यवस्था है और न ही कूलिंग के पुख्ता इंतजाम। ऐसे वार्डों में ही बच्चों और अन्य मरीजों को भर्ती किया गया है जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है।
हमारे पास पर्याप्त मात्रा में सभी प्रकार के सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल उपकरण मौजूद हैं। यदि कहीं कोई कमी है या स्टाफ द्वारा लापरवाही बरती गई है तो इसकी जांच कराकर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। - डॉ. सुदेश कुमारी, मंडलीय अधीक्षक, जिला अस्पताल