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Meerut Loksabha Seat: नहीं खिसका भाजपा का मतदाता, लगातार चौथी बार मिली जीत, दांव पर थी प्रतिष्ठा

Wed, 05 Jun 2024 11:24 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ लोकसभा सीट पर भाजपा के लिए इस बार चुनाव जीतना आसान नहीं था, लेकिन इस बार भी कहानी दोहराई गई। पर्दे के राम अरुण गोविल ने सियासी सरोवर में कमल खिला दिया। वहीं कड़ी टक्कर देने वाली सुनीता वर्मा ने हार स्वीकार की लेकिन एक कसक बाकी रह गई।
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अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा से राजेंद्र अग्रवाल पांच हजार से भी कम वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे। ऐसे में भाजपा के लिए इस सीट पर चुनाव जीतना आसान नहीं था, लेकिन भाजपा वोट बैंक नहीं खिसका, साथ ही भाजपा ने अपने चुनावी मैनेजमेंट से लगातार चौथी बार ये सीट जीत ली। 

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वहीं, पिछली बार बसपा का प्रत्याशी होने के कारण हाजी याकूब को बसपा का दलित वोट मिला था, साथ ही मुस्लिम होने व सपा से गठबंधन की वजह से मुस्लिम वोट मिला था। यही वजह थी कि हार-जीत का अंतर कम रहा था।

इस बार भी वही कहानी दोहराई गई। सुनीता वर्मा ने दलित होने की वजह से बसपा के वोटबैंक में तगड़ी सेंधमारी की। साथ ही सपा से प्रत्याशी होने के कारण एक तरफा मुस्लिम वोट मिला। मुस्लिम-दलित जुगलबंदी के कारण उन्होंने भाजपा के अरुण गोविल से कड़ा मुकाबला किया। उनकी हार की वजह यह रही कि बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी भी 87 हजार वोट पा गए।
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भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला
माना जा रहा है कि इसमें बड़ी संख्या में दलित वोट रहा। अगर देवव्रत त्यागी और कमजोर लड़ते तो सुनीता वर्मा को इसका फायदा मिलता। इसके अलावा भाजपा के वोटबैंक में दोनों ही प्रत्याशी (सुनीता वर्मा-देवव्रत त्यागी) सेंधमारी नहीं कर सके।

नतीजतन, अरुण गोविल कम अंतर से ही सही, मगर न सिर्फ जीते, बल्कि उन्होंने भाजपा की लगातार चौथी  बार जीत का क्रम भी बनाए रखा। साथ ही भाजपा ने मेरठ लोकसभा सीट पर मंगलवार को लगातार चौथी बार जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

राम की भूमिका में अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सातवीं बार भाजपा यहां से चुनाव जीती है। वर्ष 1991 में पहली बार लोकसभा चुनाव में भाजपा के अमर पाल सिंह सांसद बने। इसके बाद 1996 और 1998 के चुनाव में भी भाजपा ने ही बाजी मारी। वर्ष 1999 में भाजपा से इस सीट को कांग्रेस ने छीन लिया। वर्ष 2004 में ये सीट बसपा के खाते में चली गई। 2009 के चुनाव में भाजपा ने फिर से वापसी की। सांसद राजेंद्र अग्रवाल चुनाव जीते।

इसके बाद राजेंद्र अग्रवाल 2014 और 2019 में लगातार सांसद बने। इस बार भाजपा ने रामायण में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को प्रत्याशी बनाया। भाजपा के लिए अरुण गोविल की जीत प्रतिष्ठा का सवाल बनी थी। अरुण गोविल के चुनावी मैनेजमेंट में महानगर अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, विधायक अमित अग्रवाल, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज, संजीव वालिया, कमल दत्त शर्मा समेत महानगर और जिले के पदाधिकारी शामिल रहे।

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सुनीता वर्मा - फोटो : अमर उजाला
10 दिन और मिल जाते तो नतीजा अलग होता : सुनीता 
कम समय मिलने के बावजूद मजबूती से चुनाव लड़ा। कम अंतर से ही हार हुई। अगर 10 दिन का समय और मिल जाता तो नतीजा अलग होता।    सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने सामान्य सीट पर उन्हें टिकट दिया। टिकट थोड़ी देरी से हुआ, जिस कारण लोगों के बीच पहुंचने के लिए समय कम मिला। कई गांव छूट गए। अगर थोड़ा समय और मिल जाता तो परिणाम दूसरा होता। लोगों ने बहुत प्यार दिया है, इसके लिए सभी का दिल से आभार। आगे भी जनता की सेवा में रहूंगी।  -सुनीता वर्मा, सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी
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बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी। - फोटो : अमर उजाला
नए सिरे से बनाई जाएगी रणनीति : देवव्रत त्यागी
हमें सभी जाति धर्म का वोट मिला है। त्यागी समाज ने भरपूर प्यार दिया। दलितों का वोट भी काफी मिला है। हमने जनता से जो वादे किए थे, उनको पूरा करने का काम करेंगे। हर समय सुख-दुख में जनता के बीच रहेंगे। जो कमी चुनाव में रह गई है, उसे आगे पूरा किया जाएगा। बसपा की नीति को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए नए सिरे से रणनीति तैयार की जाएगी।   - देवव्रत त्यागी, बसपा
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