मोदीपुरम स्थित सुपरटेक स्पोर्ट्स सिटी के एफ-वन टॉवर में एक लिफ्ट पहले ही कई महीने से बंद पड़ी है, दूसरी लिफ्ट मंगलवार रात अचानक बंद हो गई। कॉलोनी के निवासियों ने किसी तरह फंसे हुए लोगों को निकाला, साथ ही मेंटेनेंस करने वालों के खिलाफ आक्रोश जताया।
सुपरटेक स्पोर्ट्स सिटी के एफ-वन टॉवर में मंगलवार रात बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान एक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में रुक गई। इस दौरान लिफ्ट में एक महिला सहित पांच-छह लोग फंसे रहे, जिनकी सांसें 15 मिनट तक अटकी रहीं। सूचना मिलते ही कॉलोनी के अन्य निवासी मौके पर पहुंचे और संयुक्त प्रयास से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना ने एक बार फिर सोसाइटी की लिफ्ट सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एफ-वन टॉवर, जिसमें 14 मंजिलों पर कुल 206 फ्लैट हैं, में दो लिफ्टें लगी हैं। दुखद बात यह है कि इनमें से एक लिफ्ट पिछले कई महीनों से खराब पड़ी है, जिसके कारण पूरे टॉवर का भार दूसरी लिफ्ट पर आ गया है। मंगलवार शाम को बिजली आपूर्ति बाधित होने पर कुछ देर के लिए जनरेटर से बिजली मिलती रही, परंतु जनरेटर के बंद होते ही चल रही लिफ्ट बीच मंजिल पर जाकर थम गई।
लिफ्ट में फंसे लोगों ने मचाया शोर
लिफ्ट में फंसे लोगों में बच्चे पार्थ के अलावा जय सिंह भदौरिया, उनकी पत्नी राधा और एक अन्य परिवार शामिल था। लिफ्ट के रुकने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। लिफ्ट में फंसे लोगों ने मदद के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। महिला के रोने की आवाज सुनकर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही विनीत और राकेश कुमार तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों और अन्य स्थानीय लोगों की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सभी को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई।
अनिवार्य सुरक्षा सुविधाओं का अभाव
निवासियों का आरोप है कि लिफ्टों में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस (एआरडी), इमरजेंसी लाइट, पर्याप्त वेंटिलेशन और प्रभावी पावर बैकअप जैसी अनिवार्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बिजली और जनरेटर दोनों बंद होने की स्थिति में लिफ्ट पूरी तरह अंधेरे में चली जाती है, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में एक बड़ा हादसा हो सकता है। यदि लिफ्ट में कोई गंभीर मरीज, बुजुर्ग, गर्भवती महिला या छोटा बच्चा फंस जाए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
रखरखाव पर भी सवाल
निवासियों ने यह भी बताया कि वे नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क जमा करते हैं, फिर भी लिफ्टों का रखरखाव संतोषजनक नहीं है। महीनों से खराब पड़ी दूसरी लिफ्ट को अब तक चालू नहीं कराया गया है, जो कि एक बड़ी लापरवाही है।
सुरक्षा ऑडिट की मांग
इस घटना के बाद निवासियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने जिला प्रशासन और विद्युत सुरक्षा विभाग से पूरे परिसर की लिफ्ट का तत्काल तकनीकी एवं सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ ही, सभी लिफ्ट में एआरडी, इमरजेंसी लाइट, पर्याप्त पावर बैकअप और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने और खराब लिफ्ट को शीघ्र चालू कराने की भी मांग की गई है। निवासियों का कहना है कि यह केवल एक टॉवर की समस्या नहीं है, बल्कि सोसाइटी में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में एक बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।