सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पश्चिमी यूपी की पहली रोग निदान प्रयोगशाला (डिजीज डाइग्नोस्टिक लैब) बनाई जा रही है। इसका बड़ा लाभ यही होगा कि पशुओं में होने वाली सभी गंभीर बीमारियों की अब कृषि विश्वविद्यालय में ही निशुल्क जांच हो सकेगी। इससे रोग को समय से पहचान कर उनका उचित उपचार होगा। पशुओं की असमय होने वाली मौत का आंकड़ा भी कम होगा। यही नहीं डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) और रीबोन्यूक्लीक एसिड (आरएनए) की भी जांच हो सकेगी। संभावना है कि 15 फरवरी से यह लैब काम करना शुरू कर देगी।
कृषि विवि के वेटनरी कॉलेज के पैथोलॉॅजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. आरती भटेले ने इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है। डॉ. आरती ने बताया कि गाय, भैंस, शूकर आदि नस्ल में मुंह पका, खुरपका बीमारी ज्यादा फैलती है। कई बीमारियों की जांच महंगी होने के कारण किसान और पशुपालक यह जांच नहीं करवा पाते हैं। ऐसे में पशुओं में होने वाले रोगों की पहचान नहीं हो पाती और उचित इलाज न मिलने से उनकी समय से पहले ही मौत हो जाती है। इससे किसानों को भी आर्थिक नुकसान होता है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए पश्चिमी यूपी में पशुओं की गंभीर बीमारियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय लैब तैयार करने का निर्णय लिया गया है। डॉ. भटेले के साथ इस प्रोजेक्ट में विकास जायसवाल, महेश भारती और सागर सारस्वत भी काम कर रहे हैं।