10वीं की मार्कशीट में 11 मई 2008 जन्मतिथि
कपसाड़ गांव में आठ जनवरी 2026 को हुई वारदात के बाद आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया गया था। आरोपी की 10वीं की मार्कशीट के आधार पर उसकी जन्मतिथि 11 मई 2008 बताई गई थी। पुलिस ने आरोपी को बालिग मानते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद उम्र निर्धारण को लेकर मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पहुंचा।
मेडिकल जांच के आधार पर जेजे बोर्ड ने माना था बालिग
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी की मेडिकल ऑसिफिकेशन जांच कराई थी। रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने पारस को बालिग माना था। इस फैसले के खिलाफ आरोपी के वकील ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। अब सेशन कोर्ट ने भी जेजे बोर्ड के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी है।
मार्कशीट का साक्ष्य मूल्य कम, मेडिकल जांच को माना उचित
अदालत के अनुसार जब शुरुआती जन्मतिथि ही पिता के मौखिक दावे के आधार पर निजी रजिस्टर में दर्ज हुई थी, तो उसी रिकॉर्ड के आधार पर तैयार 10वीं की मार्कशीट की कानूनी अहमियत भी कम हो जाती है।
इसी आधार पर अदालत ने मेडिकल जांच के जरिये उम्र निर्धारित किए जाने को न्यायसंगत माना और जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा। अब आरोपी पक्ष इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी में है।