कोरोना संक्रमण के बीच मेरठ के अस्पतालों में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग के चलते उद्योगों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी गई है। संभावना है कि अगले एक महीने तक उद्योगों को गैस सप्लाई नहीं होगी।
मेरठ में हर महीने 10 हजार सिलिंडर ऑक्सीजन की खपत उद्योगों में होती है। यदि एक महीने तक ऑक्सीजन नहीं मिली तो इससे करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। मालभाड़ा, कच्चा माल, सप्लाई के साथ ही ऑक्सीजन की किल्लत उद्योगों में शुरू हो गई है।
जिन फैक्ट्रियों ने विकल्प तलाश लिया है, उनका तो काम चल जाएगा। शेष की हालत खराब होने लगी है। पिछले तीन दिनों से उद्योगों में ऑक्सीजन सप्लाई बंद है। इसका असर उत्पादों की सप्लाई पर भी पड़ेगा। इस समय कोविड अस्पताल में रोजाना 100 से 300 सिलिंडर प्रति अस्पताल गैस जा रही है।
इन उद्योगों पर पड़ेगा ज्यादा असर
कांच, ब्रास, स्टील, आयरन की कटिंग के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मेरठ में ग्लास कटिंग, आयरन कटिंग, मोल्ड मेकर, ब्रॉस इंडस्ट्री, फेब्रिकेशन, रोलिंग मिल, बल्ब, एग्रीकल्चर, टैंक उद्योग में ऑक्सीजन सप्लाई होती है।
अस्पतालों को होगी सप्लाई
अगले एक महीने तक केवल अस्पतालों में आक्सीजन सप्लाई होगी। नॉन कोविड अस्पतालों में रोजाना 15 से 20 सिलिंडर प्रति अस्पताल सप्लाई होते हैं, लेकिन कोविड अस्पतालों में खपत बहुत बढ़ गई है। मेरठ में सात ऑक्सीजन प्लांट हैं। इसमें पांच का स्टॉक खत्म हो चुका है। -विशाल अग्रवाल,ऑक्सीजन सप्लायर
कोविड हेल्प डेस्क बनेगी
श्रमिकों को कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए हर कारखाने में कोविड डेस्क का बनाई जाएगी। शासन ने सभी कारखानों को यह आदेश जारी कर दिए हैं। कोविड 19 हेल्प डेस्क पर श्रमिकों को नियमित रूप से कोरोना से बचाव की जानकारी दी जाएगी। श्रमिकों को मास्क, ग्लब्स पहनना अनिवार्य होगा। सामाजिक दूरी का पालन किया जाएगा।
थर्मल स्क्रीनिंग व ऑक्सीमीटर से नियमित जांच होगी। कारखानों में तंबाकू का प्रयोग नहीं होगा। श्रमिक या स्टाफ में खांसी, खराश, बुखार, सांस में दिक्कत के लक्षण दिखने पर उसकी सूचना फौरन स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। कोरोना के लक्षण मिलने या बुखार, खांसी होने पर श्रमिक काम पर नहीं आएगा।