घटना 1942 की है। शहर में धारा 144 लागू थी। आंदोलनकारी शकुंतला गोयल ने शहर में फिरंगी सरकार के खिलाफ जुलूस निकालने का साहस पूर्ण कार्य किया। इससे पूर्व लेडीज पार्क में महिलाओं ने बैठक की। उसमें तय हुआ कि शकुंतला गोयल, रेवती देवी, कृष्णा देवी अपने हाथों में तिरंगा लेकर जुलूस का नेतृत्व करेंगी।
इसके बाद सभी महिलाएं एवं छात्राएं मेरठ के बाजार बजाजा स्थित एक मंदिर में इक्ट्ठा हो गईं। कुछ ही पल में जुलूस शुरू हो गया। सड़क पर देश प्रेम के नारों से आसमां गूंज उठा। सड़क पर जुलूस देख प्रशासन परेशान हो उठा।