इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस महीने जल, बेलपत्र, धतूरा और आक अर्पित करने का विशेष महत्व है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी का कहना है कि वर्षा ऋतु में प्रकृति स्वयं शिव पूजा की सामग्री उपलब्ध कराती है, इसलिए सावन आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
आचार्य मनीष स्वामी बताते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। उनके ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने जल अर्पित किया, तभी से सावन में जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
आचार्य संजय त्रिपाठी के अनुसार इस वर्ष श्रावण मास में चार सोमवार पड़ रहे हैं। इन दिनों श्रद्धा, नियम और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होने, आरोग्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति का विशेष महत्व बताया गया है।