गन्ना प्रजाति असंतुलन सुधारने के लिए गन्ना विभाग और किसानों की मेहनत रंग लाने लगी है। मंडलायुक्त के माइक्रो प्लान 2015-16 के तहत मेरठ मंडल में प्रजाति असंतुलन सुधार में गन्ना विभाग को अप्रत्याशित सफलता हाथ लगी है। मंडल में शीघ्र प्रजाति गन्ने का रकबा 24 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 37 फीसदी तक पहुंच गया है, जो आदर्श प्रजाति संतुलन (शीघ्र प्रजाति 40 फीसदी) से मात्र 3 फीसदी कम है।
मेरठ जनपद में सबसे ज्यादा 19 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं बागपत जिला सबसे फिसड्डी साबित हुआ है।
गन्ने का आदर्श प्रजाति संतुलन 60:40 यानि 60 फीसदी सामान्य और 40 फीसदी शीघ्र प्रजाति गन्ना बुआई है। लेेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सालों से गन्ना प्रजाति बुआई संतुलन बिगड़ गया है।
इसके चलते न केवल पेराई सीजन लगातार पिछड़ता जा रहा है बल्कि चीनी की रिकवरी पर भी असर पड़ रहा है। इसको देखते हुए गन्ना विभाग ने मंडलायुक्त आलोक सिन्हा के निर्देश पर माइक्रो प्लान 2015-16 बनाकर इस पर काम करना शुरू किया था। इसका सकारात्मक एवं सुखद परिणाम सामने आया है।
37 फीसदी तक पहुंचा रकबा
मंडल में शीघ्र प्रजाति का रकबा 37 फीसदी तक पहुंच गया है। जबकि गत पेराई सत्र 2014-15 में 24 फीसदी था। माइक्रो प्लान में रकबे को 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन किसानों की मेहनत और गन्ना विभाग के अधिकारियों के निर्देशन से इसमें अप्रत्याशित वृद्धि हुई।
मंडलायुक्त का माइक्रो प्लान 2015-16 कारगर साबित हुआ। गन्ना विभाग की टीम और किसानों की मेहनत के बूते शीघ्र प्रजाति गन्ना रकबा बढ़ाने में सफलता मिली है। कुछ जनपदों में मानक से ज्यादा पहुंच चुकी शीघ्र प्रजाति का कम करके आदर्श मानक स्तर पर लाया जाएगा। किसानों की बेहतरी के लिए गन्ना विभाग लगातार मेहनत करेगा। विश्वेश कनौजिया, संयुक्त गन्ना आयुक्त मेरठ