गैंगस्टर उधम सिंह करीब चार साल से उन्नाव जेल में बंद था। उसे 26 मार्च को जमानत पर रिहा किया गया था। अनवर का आरोप है कि उसे रुपयों की आवश्यकता थी। इस दौरान शेखर उसके संपर्क में आया। उसने बिना किसी दलाली के ऋण पास कराने का आश्वासन दिया। आरोपी ने उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि कागजात ले लिए।
शेखर ने उसे सरधना कचहरी ले जाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। उसने अनवर को बताया कि वह ऋण कराने का पांच फीसदी कमीशन नहीं लेगा। इसके बाद भी उसका ऋण पास नहीं हुआ तो उसने पूछताछ की। इस पर आरोपियों ने उसे धमकाकर भगा दिया। बाद में अनवर को पता चला कि आरोपियों ने उसके कागज उधम सिंह की जमानत में इस्तेमाल किए हैं।
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी शेखर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है कि उधम सिंह की जमानत रद कराने के लिए न्यायालय में भी रिपोर्ट भेजी गई है।
दो अप्रैल को ढेर हुआ था उधम सिंह का शूटर आशू उर्फ मोंटी
मुरादाबाद की निर्यात फर्म बजीरचंद्र के मालिक अरशू ढल से गैंगस्टर उधम सिंह गैंग का शार्प शूटर आशू उर्फ मोंटी चड्ढा पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहा था। वह एसटीएफ से मुठभेड़ में गोली लगने पर घायल हो गया। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। मोंटी मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी और एनसीआर में कारोबारियों से रंगदारी मांग रहा था। वह हापुड़ के हाफिजपुर थानाक्षेत्र के मीरापुर गांव का रहने वाला था और वर्ष 2010 में हत्या के मामले में जेल गया था। जेल में ही वह उधम सिंह गैंग के संपर्क में आ गया था जमानत मिलने पर उसने रंगदारी मांगना शुरू कर दिया था। रंगदारी नहीं मिलने पर उसने हत्याएं भी की थीं।
ये भी देखें...
सेंट्र
ल मार्केट: चार बैंक्वेट हॉल पर लगाई सील, घर की छत पर हुआ दो बहनों का निकाह, रंगोली मंडप में हंगामा