1962 में एक बार चीन सीमा के गरीब इच्छोगल (तिब्बत) में उनकी टीम रास्ता भटक गई थी। उसी दौरान एक तिब्बती युवक से उन्होंने रास्ता पूछा। तो उसने रास्ता बताने के बदले उनसे उनका कंबल मांगा। भरी सर्दी में वेदपाल ने उस व्यक्ति को अपना कंबल दिया था। उसके बाद वह टीम के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचे थे।
पूर्व सैनिक के इकलौते बेटे रविंद्र सिंह व पौत्र कुश चौधरी बताते हैं कि वे अपने आवश्यक कार्य खुद ही करते है। वहीं वेदपाल सिंह की छोटी बहन ओमकारी की ससुराल देवबंद के गांव गुनारसा में थी। वे बताते हैं कि वह अपनी बहन से मिलने के लिए गुनारसा गए थे। उसी दौरान बहन के ससुर ने सेना भर्ती होने की बात कही तो वह अगले ही दिन नसीराबाद भर्ती में पहुंच गए, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया।
पूर्व सैनिक वेदपाल सिंह कहते हैं कि किसी भी देश की असली शक्ति उसके सैनिकों के मनोबल में होती है, न की मशीनरी में। सरकार को अपने सैनिकों के मनोबल को और बढ़ाना होगा। उन्होंने पाक को धोखेबाज बताते हुए उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग सरकार से की। जांबाज अभिनंदन के भारत लौटने पर हर्ष जाहिर किया हैं।
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