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पूर्व विदेश सचिव से अमर उजाला की खास बातचीत, बोले- ऐसे टूटेगी पाकिस्तान की कमर

Thu, 21 Feb 2019 03:05 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पूर्व विदेश सचिव शशांक - फोटो : अमर उजाला
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विदेशी मामलों के जानकार और चार साल पाकिस्तान में बतौर भारतीय कूटनीतिज्ञ बिताने वाले पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि भारत में जो आतंकी हमले हो रहे हैं, यह पाकिस्तानी हुक्मरानों की पूरी प्लानिंग का परिणाम हैं। दरअसल, पाकिस्तान कमजोर होता जा रहा है और इसे छुपाने के लिए वह इस तरह की हरकतें कर रहा है। खास तौर पर वहां के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा चाहते हैं कि इन्हीं हरकतों के दम पर रिटायर होने के बाद वह किसी इस्लामिक सेना के प्रमुख बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी हो रही है। इसी से पाकिस्तान की कमर टूटेगी।

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शशांक मेरठ के रहने वाले हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रवैया हमेशा से खराब रहा है। उसकी सोच है कि यदि वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो बाकी देश भारत पर बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने का दबाव बनाएंगे। वह इस बात पर ध्यान नहीं दे रहा कि अब सारे देश पाकिस्तान की ऐसी हरकतों से थक चुके हैं।

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पाक को सिखाना होगा सबक
पाकिस्तान की रक्षा नीति के साथ-साथ वहां का परमाणु कार्यक्रम भी सेना के नियंत्रण में है। इसके चलते वहां सैन्य अधिकारी सोचते हैं कि  वह किसी को भी डरा सकते हैं। झगड़ा बढ़ा तो वह परमाणु युद्ध की दिशा में जा सकते हैं। हमें उन्हें सबक सिखाना होगा ताकि वह आगे से ऐसा न करें। वर्ष 2016 में जब सार्क सम्मेलन होना था, उस समय बंग्लादेश व अफगानिस्तान समेत अन्य देशों ने उसकी यह शिकायत की थी। इसलिए पाकिस्तान में शिखर सम्मेलन नहीं हो पाया था। दरअसल पाकिस्तान अपने मित्र देशों को यह दिखाना चाहता है कि उसके पास अब भी बड़ी हिम्मत है। वह कहीं भी कुछ भी करा सकता है। कुछ इस्लामिक देशों को यह दिखाकर उसका इरादा पैसे बटोरने का रहता है। हालांकि अमेरिका उससे मुंह मोड़ चुका है।

पीएम पर दबाव बनाने को करते हैं खून खराबा
आप याद करें कि पाकिस्तान के पुराने सेना प्रमुख राहिल शरीफ को रिटायरमेंट के बाद एक ऐसे ही देश की इस्लामिक फोर्स की कमान मिल गई थी। अब पाकिस्तान के वर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा भी यही सोच रहे हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें भी किसी इस्लामिक सेना की कमान मिल जाएगी। कुछ नया मिशन शुरू कर पाएंगे। शशांक कहते हैं कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से भी यह हो रहा है। वह पड़ोसी देशों में खूनखराबा करते हैं। पाक में जो भी प्रधानमंत्री बनता है, उस पर नियंत्रण पाने के लिए भी यह करते हैं। उन्हें डर रहता है कि नए सेना प्रमुख के चुनाव में कहीं प्रधानमंत्री हावी न हो जाएं। यह दिखाया जाता है कि पीएम केवल बोलने के लिए है। वह केवल वही काम करें, जो सेना कहे।
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आतंकवादी गुटों पर अंकुश लगाया जाए 
भारत में सीआरपीएफ जवानों पर हुआ आतंकी हमला हो या अन्य। हमारी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी अवश्य ऐसे मसलों पर निर्णय ले रही होगी। फिलहाल पीएम ने भी सेना को खुली छूट दी है। हमने देखा है कि फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र में पहल की है कि पाकिस्तान के आतंकवादी गुटों पर अंकुश लगाया जाए। कुछ दिन पहले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति भारत आए थे। उन्होंने जी-20 का सदस्य होने के नाते यह बात कही कि आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होना है। जी-20 में जो बात हुई उसके चलते फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स पाकिस्तान को ग्रे एरिया की लिस्ट में डाल चुकी है, ताकि उस पर और प्रतिबंध लगाए जा सकें। अगला जी-20 सम्मेलन जल्द ही जापान में होना है। उसमें भी यह बात रखी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय लामबंदी से ही पाकिस्तान की कमर पूरी तरह से टूटेगी। युद्ध का विकल्प तो खुला है ही।

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