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Meerut: शहर के 1500 कोचिंग सेंटर्स पर खतरे की घंटी, सिर्फ तीन के पास NOC, आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी

Tue, 23 Jun 2026 10:46 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

Meerut News Update: मेरठ में संचालित 1500 से अधिक कोचिंग सेंटरों में केवल तीन के पास दमकल विभाग की एनओसी है। लखनऊ अग्निकांड के बाद अब अग्निशमन विभाग अभियान चलाकर जांच करेगा।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद मेरठ में जागा प्रशासन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ जिले में लगभग 1500 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि केवल तीन केंद्रों ने दमकल विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) ली हुई है। कई कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। एक हजार से अधिक कोचिंग सेंटर शहर के गली मोहल्लों में संचालित किए जा रहे हैं। 

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अगर यहां आग लगी तो दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल होगा और कई जान खतरे में पड़ जाएंगी। लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड के बाद दमकल विभाग ने जिले में अभियान चलाकर कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण करने की बात कही है।

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जिले में रोहटा रोड, पीएल शर्मा रोड, कंकरखेड़ा श्रद्धापुरी रोड, सरधना रोड, ईदगाह रोड, सदर बाजार क्षेत्र, जैन नगर और शहर की अधिकांश कॉलोनियों तीन तरह के कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या स्कूल-कॉलेज के बच्चों को पढ़ाने वाले कोचिंग सेंटरों की है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने वाले और कंप्यूटर प्रशिक्षण देने वाले केंद्र भी बड़ी संख्या में संचालित हैं।

स्कूल-कॉलेज के बच्चों के कोचिंग सेंटर शहर की हर कॉलोनी और मोहल्ले में हैं। शुरुआत में कई शिक्षक अपने घर में कोचिंग सेंटर चलाते हैं। छात्रों की संख्या बढ़ने पर किसी अन्य मकान या दुकान में कोचिंग सेंटर चलाने लगते हैं। इनमें कई कोचिंग सेंटर तो घरों के कमरे और फ्लैटों में संचालित हो रहे हैं। कई कोचिंग सेंटर बाजारों और मुख्य मार्ग पर हैं लेकिन ये भी आग के मुहाने पर हैं। इसके बावजूद इन कोचिंग सेंटरों मेें शहर के बड़ी संख्या में छात्र-छात्रा पढ़ने के लिए जाते हैं।   

आग से बचाव के उपकरण नहीं
अधिकांश कोचिंग सेंटरों में एसी लगाए गए हैं। छात्रों को लुभाने के लिए अन्य सुविधाएं भी दी गईं हैं लेकिन आग से बचाव के लिए पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था नहीं की गई है।

20 से अधिक हैं बड़े कोचिंग सेंटर 
सीएफओ ने बताया कि कुछ दिन पहले जब बड़े कोचिंग सेंटरों का आकलन किया गया था। उस दौरान पता चला था कि जिले में 11 बड़े कोचिंग सेंटरों में छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए जाते हैं और लगभग इतने ही बड़े कोचिंग सेंटरों में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। 

बेसमेंट में पढ़ रहे छात्र, सीढि़यां भी हैं छोटी
शहर में कई कोचिंग सेंटर न केवल प्रथम व द्वितीय तल पर बल्कि एक दो केंद्र बेसमेंट में भी संचालित हो रहा है। अधिकांश कोचिंग सेंटरों की सीढि़या काफी छोटी हैं। इनमें छात्रों को एक साथ उतरने चढ़ने में भी परेशानी होती है।

कॉकरोच पार्टी के आंदोलन के दौरान खुफिया विभाग हुआ था अलर्ट
काॅकरोच पार्टी के आंदोलन की घोषणा करने के बाद मेरठ में पुलिस और खुफिया विभाग अलर्ट हुए थे। आशंका जताई जा रही थी कि आंदोलन में कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्र शामिल हो सकते हैं। तब यह पता लगाने का प्रयास किया गया था कि कितने बड़े कोचिंग सेंटर यहां संचालित हैं।
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आपातकालीन निकास और अग्निशमन यंत्रों की कमी
जिले में करीब 1500 कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जिनमें से केवल 400 ही पंजीकृत हैं। शेष संस्थान बिना आवश्यक मानकों के चल रहे हैं। बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर बहुमंजिला इमारतों और संकरी गलियों में हैं। वहां अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

आपातकालीन निकास और अग्निशमन यंत्रों की कमी है। अभिभावकों और छात्रों ने प्रशासन से सभी सेंटरों  की जांच और बिना पंजीकरण वालों पर कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों की समीक्षा का आश्वासन दिया है।

जिले में केवल तीन कोचिंग सेंटर के पास विभाग की एनओसी है। लखनऊ की घटना को देखते हुए जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों का मंगलवार से अभियान चलाकर निरीक्षण किया जाएगा। -सुरेंद्र सिंह, सीएफओ
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