शनिवार सुबह 4:30 बजे थे और शिवशक्तिनगर माधवपुरम में महिलाएं मंदिर जा रही थीं। रास्ते में पड़े कचरे के ढेर से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर चार-पांच महिलाएं सहम गईं। महिलाओं ने शोर मचाया। कुछ लोगों ने देखा तो एक नवजात पड़ा था। चार बेटियों के पिता प्रदीप वर्मा ने नवजात को उठाकर सीने से लगाया और घर ले आए। चार बेटियां नवजात को भाई मानकर ख्याल रखने लगीं, लेकिन आठ घंटे बाद दोपहर करीब 12:30 बजे कानून का हवाला देकर नवजात को परिवार से अलग कर पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करा दिया।
नवजात शिवशिक्तनगर में भाजपा पार्षद दीपक वर्मा के आवास के पास मिला था। बच्चा स्वस्थ है। वह खून से लथपथ था, जिससे अनुमान है कि दो-तीन घंटे पहले ही उसने जन्म लिया है। उसके माता-पिता कौन हैं और उसे कचरे में क्यों फेंका गया। इसकी किसी को भी जानकारी नहीं है। कचरे में नवजात बालक को देखकर प्रदीप वर्मा अपने घर ले आए। उनके कोई बेटा नहीं है। प्रदीप वर्मा ने कहा कि मैं बच्चे गोद ले लेता हूं। मुझे वारिस और बेटियों को भाई मिल जाएगा। क्षेत्रीय पार्षद दीपक वर्मा और राजकुमार मांगलिक की मौजूदगी में माधवपुरम के लोगों की पंचायत हुई। जिसमें तय हुआ कि बच्चा प्रदीप को ही मिल जाए।
पुलिस को लौटाया तो बाल कल्याण की टीम भी पहुंची
दोपहर 12 बजे तक बच्चे का इलाज चला और खर्च प्रदीप वर्मा ने उठाया। माधवपुरम पुलिस चौकी से पुलिसकर्मी आए तो लोगों ने बच्चे को गोद लेने का हवाला देकर लौटा दिया। करीब 12:30 बजे पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बाल कल्याण विभाग की टीम के साथ माधवपुरम पहुंचे। पुलिस-प्रशासन ने लोगों को कानून का हवाला देकर समझाया कि ऐसे किसी बच्चे को गोद नहीं लिया जा सकता। जिस पर पुलिस और स्थानीय लोगों की तीखी बहस भी हुई। कानूनी प्रक्रिया के बाद ही प्रदीप वर्मा को बच्चा दिलाने की बात कही, जिसके बाद बच्चे को बाल कल्याण की टीम माधवपुरम से जिला अस्पताल ले गई।