गांव अब्दुल्लापुर के समीप गंगानगर आवासीय कॉलोनी (एक्सटेंशन) की भूमि मामले में मुआवजे के लिए 21 दिनों से धरने पर बैठे किसान और पुलिस मंगलवार को आमने-सामने आ गए। करीब तीन घंटे तक खूब हंगामा हुआ। मेडा के अधिकारियों के साथ पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया। किसान नहीं मानें, बोले- मर जाएंगे लेकिन मुआवजे के बिना जमीन नहीं देंगे।
महिला को उठाने का प्रयास करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
काफी मान-मनौव्वल, नोकझोंक, खींचतान और धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने बल पूर्वक उन्हें धरने से हटा दिया। दो महिलाओं और पांच किसानों को हिरासत में ले लिया। बाद में महिलाओं को छोड़ दिया, जबकि पांचों किसानों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। मेडा अधिकारियों को कहना है कि करीब 28 हजार वर्ग मीटर भूमि को कब्जा मुक्त कराया है।
महिलाओं को धकियाती पुलिस।
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भावनपुर थाना क्षेत्र के गांव अब्दुल्लापुर के समीप गंगानगर एक्सटेंशन द्वितीय योजना के तहत मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने अब्दुल्लापुर, प्रगतिनगर और सर्वोदय नगर के किसानों की भूमि का तीस रुपये प्रति गज के हिसाब से 1992 में अवार्ड किया था। इसका खसरा नंबर 780, 781, और 782 है।
किसानों का कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। उन्हें आज के सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाए जो करीब 24600 रुपये प्रति गज है। वहीं मेडा अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा दे दिया गया है लेकिन किसान नई दरों के हिसाब से मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। इन गांवों के किसान पिछले 21 दिनों से मुआवजे के लिए धरना दे रहे थे। इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी थीं।
मंगलवार को मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव आनंद कुमार, जोनल अधिकरी अर्पित यादव, योजना प्रभारी निकेता सिंह, जेई और प्रवर्तन दल के साथ इस भूमि पर पहुचे। यहां पीएसी, महिला पुलिस के साथ सीओ सदर देहात, गंगानगर, भावनपुर सहित कई अन्य थानों की पुलिस भी मौजूद रही।
मेडा अधिकारियों ने धरने पर बैठे किसानों को धरना खत्म करने के लिए कहा लेकिन किसान नहीं माने। इस पर पुलिस बल पूर्वक महिलाओं और किसानों को हटाते हुए राष्ट्रीय वीर गुर्जर सेना के राष्ट्रीय सचिव गौरव गुर्जर काजीपुर, नेपाल सिंह, राजेंद्र, नरेश और देवेंद्र व दो महिलाओं अर्चना और राजकली को हिरासत में ले लिया। बल पूर्वक भीड़ को वहां हटाकर धरना खत्म कराया। महिलाएं मिन्नतें करती रहीं कि ऐसा न करें। पुलिस कई लोगों को हाथ-पैर पकड़कर उठाकर भी ले गई। हिरासत में लिए लोगों को थाने ले जाया गया, जहां दोनों महिलाओं को छोड़ दिया गया जबकि पांचों किसानों का शांति भंग में चालान कर न्यायालय में पेश किया गया। हालांकि उन्हें जमानत मिल गई।
बेहोश हुई महिला
धरने पर बैठे किसानों को पुलिस ने जबरन हटाने की कोशिश की। किसानों ने इसका विरोध किया। इस दौरान किसान मनोहर की मां राजकली बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं। लोगों ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद उन्हें होश आ गया। मनोहर की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है।
जेसीबी से झोपड़ी तोड़कर की गई हदबंदी
मेरठ विकास प्राधिकरण ने तीन जेसीबी द्वारा धरना स्थल पर बनाई गईं किसानों की झोपड़ियों को तोड़कर हदबंदी करा दी है।
पहले भी हुआ था विवाद
मेडा ने 15 दिसंबर 2025 को भी पुलिस बल की मौजूदगी में इस भूमि पर उगाई गई किसानों की सरसो की फसल को बर्बाद कर दिया था। इसके अगले दिन से किसान विरेंद्र कुशवाहा, नरेश, देवेंद्र, महेश, मनोज, सुशील, धर्मेंद्र, पुष्पा, राजवती, जवां और पूनम सहित अन्य लोग दिन रात खेतों पर धरना दे रहे थे।