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Meerut: राज्यपाल के दौरे के बीच किसान नेता नजरबंद, तीन दिन घर से बाहर नहीं निकल सके, 20 माह से धरना जारी

Wed, 22 Jul 2026 06:20 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के खरखौदा क्षेत्र में औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों में आक्रोश है। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल बाबूजी का आरोप है कि राज्यपाल के तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन्हें लगातार तीन दिन तक पुलिस निगरानी में घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
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किसान नेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोदीपुरम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान किसान नेता को घर से बाहर नहीं निकलने देने का मामला सामने आया है। औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल बाबूजी का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें लगातार तीन दिन तक उनके आवास पर ही रोककर रखा।

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20 माह से धरने पर बैठे हैं करीब 800 किसान
खरखौदा क्षेत्र के छतरी मोड़ पर किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में खड़खड़ी, छतरी, गोविंदपुर सहित आसपास के गांवों के करीब 800 किसान पिछले 20 माह से धरने पर बैठे हैं। किसान औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उनकी सहमति के बिना अधिग्रहण किया जा रहा है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। किसानों के अनुसार, कई दौर की वार्ता और अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद अब तक उनकी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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किसान नेता बोले- बिना लिखित आदेश घर से निकलने नहीं दिया
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल बाबूजी का कहना है कि राज्यपाल के मेरठ प्रवास के दौरान पुलिसकर्मी लगातार तीन दिन तक उनके आवास के बाहर तैनात रहे। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया और आने-जाने वालों पर भी नजर रखी गई।

सोपाल बाबूजी का आरोप है कि उन्हें किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं दिखाया गया और न ही घर से बाहर निकलने से रोकने का कोई वैधानिक कारण बताया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है, ताकि उनकी समस्याएं राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक न पहुंच सकें।

दो अगस्त को मुख्यमंत्री से मिलने का ऐलान बरकरार
किसानों ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि यदि दो अगस्त को नंगलामल गांव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संभावित दौरा होता है तो वे उनसे मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। किसानों का आरोप है कि इसी घोषणा के बाद से पुलिस प्रशासन ने किसान नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी।

धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन पिछले 20 माह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है। इसके बावजूद किसान नेता को घर में रोकना दमनात्मक कार्रवाई है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन को दबाने का प्रयास जारी रहा तो क्षेत्र के किसान एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
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प्रशासन बोला- सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए गए
उधर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राज्यपाल के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता थी। इसी के तहत एहतियातन आवश्यक कदम उठाए गए।

हालांकि, किसानों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर किसी नागरिक को बिना लिखित आदेश के घर में रोकना उचित नहीं है। किसानों ने स्पष्ट किया कि दो अगस्त को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होने की स्थिति में वे उनसे मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेंगे।

किसान संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को मुख्यमंत्री से मिलने से रोका गया तो आंदोलन को जिले से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। किसानों का कहना है कि अपनी जमीन और अधिकारों की लड़ाई वे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
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