गाजियाबाद जिला जज कोर्ट में हुए लाठीचार्ज को लेकर मेरठ के अधिवक्ता दो गुटों में बंट गए हैं। इसे लेकर बुधवार को कचहरी परिसर राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया। एक गुट ने न्यायिक कार्य का समर्थन तो दूसरे ने विरोध किया। कुछ अधिवक्ताओं ने मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष का पुतला फूंका। वरिष्ठ अधिवक्ता रोहिताश्व कुमार अग्रवाल ने इस बाबत कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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कचहरी में सभा को संबोधित करते रोहिताश्व अग्रवाल और मौजूद वकील।
- फोटो : अमर उजाला
केन्द्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन रोहिताश्व कुमार अग्रवाल व संचालक अमित दीक्षित द्वारा निर्णय लिया गया था कि सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य करेंगे और भविष्य में गाजियाबाद प्रकरण को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार व महामंत्री आनन्द कश्यप ने प्रस्ताव पारित किया कि गाजियाबाद बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेंगे।
कचहरी में वकीलों के दोनों गुटों के बीच में होता हंगामा।
- फोटो : अमर उजाला
दोनों बार के विरोधाभास को लेकर मेरठ कचहरी में असमंजस की स्थिति रही। अधिवक्ताओं के एक गुट ने मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष का पुतला फूंका। वहीं, अध्यक्ष द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यूपी बार कौंसिल के निर्देशों का पालन करने की बात कही। इन हालात में अधिकांश अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया। बुधवार को मेरठ बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित करते हुए नियमित रूप से न्यायिक कार्य किए जाने का निर्णय लिया।
वहीं जिला बार एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को न्यायिक कार्य न किए जाने का निर्णय लिया है। अध्यक्ष ने चौधरी नरेन्द्रपाल सिंह, सतीश चंद गुप्ता, राजपाल रजपुरा, महामंत्री अमित कुमार दीक्षित की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया कि गाजियाबाद में अधिवक्ताओं के दो गुटों के मध्य सम्पत्ति को लेकर विवाद है। इसके चलते उक्त घटना घटित हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला जज द्वारा पुलिस बल नहीं बुलाया गया था और न ही लाठीचार्ज के आदेश जिला जज ने दिए थे। कोर्ट परिसर में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से हाथापाई के बाद पुलिस बल हरकत में आया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी बार कौंसिल ने पांच सदस्यों की कमेटी घटित की है। इसमें अजय यादव, मधुसूदन त्रिपाठी, अरुण त्रिपाठी, प्रशान्त सिंह अटल और रोहिताश्व अग्रवाल समेत अन्य सदस्यों ने घटना की जांच की। रोहिताश्व कुमार अग्रवाल ने बताया कि गाजियाबाद कोर्ट के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिसमें सारी घटना सुरक्षित है। फुटेज में स्पष्ट है कि कोर्ट के अंदर की घटना जिला जज की मौजूदगी में नहीं हुई। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट बार कौंसिल में दाखिल कर दी गई है। आगामी कुछ दिनों में बार कौंसिल उचित निर्णय लेगा।
घटनाक्रम राजनीतिक: रोहिताश्व अग्रवाल
रोहिताश्व कुमार अग्रवाल ने मेरठ के घटनाक्रम को राजनीतिक बताया। उन्होंने पुतला दहन करने व अधिवक्ता विधिक व्यवसाय के विरुद्ध कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यूपी बार कौंसिल के निर्णय के अनुसार ही रणनीति बनाई जाएगी।
बुधवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने कचहरी में नारेबाजी करते हुए न्यायिक कार्य करने से अन्य अधिवक्ताओं को रोका। अधिवक्ताओं द्वारा दोपहर बाद रजिस्ट्री कार्य को बंद करा दिया। बृहस्पतिवार को भी न्यायिक कार्य होने या न होने पर असमंजस की स्थिति है।