एसएससी उत्तराखंड की मल्टी टास्किंग (नॉन टेक्निकल) स्टॉफ और हवलदार परीक्षा में रिमोट से नकल कराने का भंडाफोड़ हुआ है। मेरठ एसटीएफ ने परीक्षा लैब के पास यूपीएस रूम के अंडरग्राउंड चैंबर में चालू हालत में दो लैपटॉप और चार मोबाइल बरामद किए हैं।
एसएससी उत्तराखंड की ओर से संचालित मल्टी टास्किंग (नॉन टेक्निकल) स्टॉफ और हवलदार परीक्षा -2025 में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर रिमोट एक्सेस साधनों के जरिए नकल कराने वाले केंद्र प्रबंधक समेत सॉल्वर गिरोह के दो सदस्यों को मेरठ एसटीएफ ने देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।
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इनके पास से परीक्षा लैब के पास यूपीएस रूम के अंडरग्राउंड चैंबर में चालू हालत दो लैपटॉप, चार मोबाइल और डिवाइस बरामद हुई है। गिरफ्तार किए गए सुरजीपुर भाटपाररानी देवरिया निवासी नीतिश कुमार और सरस्वतीपुरम देहरादून निवासी भास्कर नैथानी से कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी गई है।
ऑनलाइन प्रचलित भर्ती परीक्षा में सिस्टम हैक करने एवं सॉल्वर बैठाकर परीक्षा कराने की शिकायत मिलने के बाद एसटीएफ ने गिरोह को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। एसटीएफ के एएसपी बृजेश सिंह के मुताबिक 13 फरवरी को मुखबिर से सूचना मिली कि महादेव डीजिटल जोन (एमकेपी) इंटर कालेज देहरादून के परीक्षा लैब के पास बने यूपीएस रूम में एसएससी की ओर से संचालित ऑनलाइन मल्टी टास्किंग (नॉन टेक्निकल) स्टॉफ और हवलदार परीक्षा-2025 में कंप्यूटर सिस्टम हैक करके अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर परीक्षा में नकल कराई जा रही है। यह जानकारी एसटीएफ देहरादून के साथ साझा ही गई।
इसके बाद देहरादून के सीओ एसटीएफ जगदीश चंद्र पंत को साथ लेकर महादेव डिजिटल जोन (एमकेपी) इंटर कॉलेज देहरादून टीम पहुंची। वहां वेन्यू हेड को कारण बताते हुए परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति प्राप्त की गई। परीक्षा लैब के पास बने यूपीएस रूम की जब तलाशी ली गई तब अंडरग्राउंड चैंबर में दो ऐसे लैपटॉप चालू मिले, जिन पर कर्सर मूव कर रहा था।
उसे देखने से प्रतीत हो रहा था कि इनको कहीं से रिमोटली चलाया जा रहा है। एक लैपटॉप में दो विंडो ओपन मिले, जिसमें एक आंशिक रूप से टर्मिनल विंडो प्रदर्शित हो रही थी और उसके ऊपर एक अन्य विंडो पर 16 कार्डस / आइकन दिखाई दे रहे थे। दूसरे लैपटॉप को देखने पर पता चला कि उसमें चार विंडो ओपन हैं, जिसमें से एक विंडो नेटवर्क कनेक्शन का खुला हुआ है।
इसमें कुछ आईपी एड्रेस प्रदर्शित हो रही थी। इसके बाद गहन छानबीन करने पर परीक्षा में रिमोट से नकल करवाने का भंडाफोड़ कर दिया गया। इस दौरान अतिरिक्त चैंबर में ईथरनेट कनेक्टिंग एडाप्टर, राउटर चार्जर भी प्रदर्शित होते पाए गए। इसके बाद दोनों साल्वरों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इलेक्ट्रिशियन है नितीश
बृजेश सिंह ने बताया कि नितीश माता-पिता व भाई के साथ नांगलोई दिल्ली में किराये के मकान में 2007 से रहता है। वह इलेक्ट्रिशियन है। आरोपी ने अपने साथी नकल माफिया के कहने पर राउटर को पावर सप्लाई व इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए अवैध रूप से छिपाकर चैंबर में अंडरग्राउंड वायर लैब व कैमरे से कनेक्ट किया था। इसके जरिए नकल कराई जा रही थी। एएसपी ने बताया कि पूर्व में एसएससी की ओर से अयोजित दिल्ली पुलिस चालक की परीक्षा में भी नितीश नवंबर- 2025 में इसी कैम्पस में आया था। उस दौरान यह सेटअप नितीश ने अपने साथियों से बनवाया था।
10 लाख में नकल का सौदा, चार लाख एडवांस
नितीश कुमार ने पूछताछ में एसटीएफ को कई चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं। नितीश ने एसटीएफ को बताया कि नकल माफिया ने उससे कहा था कि वह लोग इस परीक्षा के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये पास कराने के लेते हैं, यदि तुम्हारा कोई अभ्यर्थी होगा तो उससे चार लाख रुपये एडवांस ले लेना और बाकी रकम पास होने के बाद ले ली जाएगी। नितीश अपने साथी नकल माफिया के कहने पर परीक्षा वाले दिन सुबह छह से 6.30 बजे के बीच यूपीएस रूम के चैंबर को ओपन कर लैपटॉप ऑन कर देता था और फिर ढक्कन लगाकर चैंबर को बंद कर उसके ऊपर सामान रखकर छिपा देता था।
रिमोट कंट्रोल के माध्यम से हल करते थे प्रश्न पत्र
नितीश कुमार केंद्र के परीक्षार्थियों के कंप्यूटर की आईपी लिस्ट को एक पेपर में लिखकर उसकी फोटो व्हाट्सअप के माध्यम से अपने साथी नकल माफिया को सेंड करता था। इसी आईपी के जरिये प्रॉक्सी एडमिन कंप्यूटर में मौजूद रिमोट एक्सेस टूल के माध्यम से दूर बैठकर पेपर हल कराते थे। महादेव डिजीटल जोन (एमकेपी) इंटर कॉलेज देहरादून में बनाए गए परीक्षा केंद्र का वेन्यू ओनर भास्कर नैथानी है। नैथानी ने ही नितीश कुमार को नौकरी पर रखा था।