पावली स्थित रेलवे ट्रैक पर मंगलवार तड़के चार बजे प्रेमी युगल का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मामला हत्या या आत्महत्या में पूरी तरह से उलझा हुआ है।
शवों का पोस्टमार्टम न कराने के बावजूद युवक के पिता ने किशोरी के परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया है। ऐसे संगीन मामले में पोस्टमार्टम न कराने पर पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
दौराला थानाक्षेत्र के पवरसा गांव निवासी अंकित कुमार (22) पुत्र विमल सिंह का गांव का ही एक किशोरी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। किशोरी दसवीं कक्षा की छात्रा थी।
दोनों के परिवार दलित समाज से हैं और खेती करते हैं। अंकित का हाल ही में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में नंबर आ चुका था। मंगलवार तड़के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के पावली स्थित रेलवे ट्रैक पर अंकित और किशोरी का शव पड़ा होने की सूचना पर कंकरखेड़ा और दौराला थाना पुलिस के अलावा दोनों के परिजन भी मौके पर पहुुंचे।
पुलिस भूली कानून
अंकित के परिजनों ने इसे हत्या तो किशोरी के परिजनों ने इसे आत्महत्या बताया। इस बीच गणमान्य लोगों द्वारा शवों का पोस्टमार्टम न कराने का सुझाव कंकरखेड़ा पुलिस ने एकदम से मान लिया। जबकि बाद में किसी भी फजीहत से बचने के लिए पुलिस को पोस्टमार्टम कराना चाहिए था।
पोस्टमार्टम कराने के बजाए पुलिस ने कानून भूलते हुए दोनों के शव उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिए। बाद में ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों के परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार भी कर दिया।
हत्या की यह दी दलील
विमल ने बताया कि उसके बेटे अंकित के शरीर पर चोट के निशान जरूर थे, लेकिन ट्रेन से उसके शरीर का कोई अंग नहीं कटा। जिससे साफ जाहिर है कि अंकित ने आत्महत्या नहीं, बल्कि उसका मर्डर हुआ है। उसने यह भी आरोप लगाया कि अंकित घर से कब गया, इसकी जानकारी उनको नहीं थी।
सोमवार रात करीब तीन बजे किशोरी के परिजन उसके घर आए थे। जिन्होंने किशोरी के रात करीब 12 बजे घर से फरार होने की जानकारी दी। उसके बाद अंकित को देखा गया तो वह भी कमरे में नहीं मिला।
परिवार का लाडला था अंकित
परिजनों ने बताया कि अंकित दो भाईयों पुष्पेंद्र और आशू में मझला था। अंकित परिवार का लाड़ला था। आईटीबीपी में नंबर आने पर परिवार में बेहद खुशी थी। लेकिन जब उसकी मौत की जानकारी घर पहुंची तो कोहराम मच गया। मां बबीता और बहन का रो-रोकर बुरा हाल था।
वहीं, युगल के ट्रेन से कटकर जान देने की सूचना गांव में आग की तरह फैली। दोनों के शव जब घर पहुंचे तो ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। दिन भर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं।
मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी
किशोरी के पिता का कहना है कि उसकी बेटी घर में सबसे छोटी होने की वजह से सभी की चहेती थी। मैंने कई बार अंकित और बेटी को समझाया था कि यह सब आपस में ठीक नहीं है। लेकिन दोनों अचानक ही इतना बड़ा फैसला ले लेंगे, इसकी मुझे उम्मीद नहीं है। मैंने भी अपनी लाडली बेटी को खोया है।
पुलिस ने की जल्दबाजी
इस पूरे प्रकरण की खास बात यह है कि दोनों के परिजनों के संज्ञान में प्रेम संबंध तो थे, लेकिन अभी शादी जैसी कोई बात नहीं थी। पुलिस ने काफी जल्दबाजी की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो जाता कि यह हत्या का मामला है या आत्महत्या का।
इस जल्दबाजी के सवाल पर कार्यवाहक थाना प्रभारी कंकरखेड़ा जितेंद्र चौधरी का कहना है कि परिजनों ने पहले खुद ही पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया था। इसमें पुलिस क्या कर सकती है। अब यदि अंकित के पिता हत्या का आरोप लगा रहे हैं तो मौखिक आरोपों से कुछ नहीं होता। वह तहरीर दें। पुलिस जांच कर कार्रवाई करेगी।