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उत्तर प्रदेश: अदालत ने इंस्पेक्टर और आरक्षी को सुनाई दस साल की सजा

Thu, 30 Aug 2018 05:53 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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मेरठ में करीब 22 साल पहले थाना सरधना में एक बंदी द्वारा फांसी लगाए जाने के मामले में पंचम अपर जिला जज मंजीत सिंह श्यौरान ने तत्कालीन इंस्पेक्टर जयचंद सिंह व आरक्षी भगीरथ सिंह को 10-10 साल कारावास व अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

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थाना सरधना में सात अगस्त 1996 को लूट के नामजद आरोपी रविन्दर पुत्र महीपाल सिंह निवासी ग्राम शौरम थाना शाहपुर जिला मुजफ्फरनगर ने हवालात में बने शौचालय में जंजीर से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। रविन्दर की संदिग्ध हालात में पुलिस हिरासत में मौत हुई।

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इस मामले में एसएसपी मेरठ ने एसपी देहात को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। इसकी विवेचना तत्कालीन सीओ सरधना जगदीश सिंह ने की। उन्होंने अंतिम रिपोर्ट को तीन जून 1998 को तत्कालीन सीजेएम ने स्वीकार कर लिया। लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देश व मानवाधिकार आयोग के आदेश पर मामले की जांच सीबीसीआईडी ने की। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद इसकी सुनवाई अपर जिला जज पंचम की कोर्ट में की गई। जहां सरकारी वकील पंकज भारद्वाज व संजीव कुमार ने वादी तथा सीओ जगदीश सिंह व रामपाल सिंह सहित कई गवाह पेश किये। 

उनके बयानों के आधार पर तत्कालीन इंस्पेक्टर सरधना जयचंद सिंह तथा आरक्षी भगीरथ सिंह को रविन्दर की मौत का दोषी माना गया। उन्हें 10-10 साल कैद और 60-60 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है। इस मामले में तत्कालीन दरोगा रहीसुल हसन जाफरी, ऋषिपाल सिंह, आरक्षी महेन्द्र सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

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