मेरठ कॉलेज के शिक्षकों की एसोसिएशन मेक्टा ने शनिवार को मूटा (मेरठ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) के पदाधिकारियों के सामने अपनी 12 मांगें रखीं। इन मांगों को विश्वविद्यालय से पूरी कराने को कहा। शिक्षकों ने बोर्ड ऑफ स्टडीज और आरडीसी का अधिकार कॉलेज के शिक्षकों को वापस देने की मांग की। प्राइवेट छात्रों का परीक्षा केंद्र बनाए जाने के मामले में एरिया के हिसाब से छात्रों की संख्या तय करने को कहा।
मेरठ कॉलेज के सेल्फ फाइनेंस विभाग में मूटा के नए पदाधिकारियों का स्वागत किया। अध्यक्ष डॉ. विकास शर्मा, महामंत्री डॉ. जय कुमार सरोहा, तीन उपाध्यक्ष डॉ. नीलम पंवार, डॉ. रीना राय, डॉ. निवेदिता और प्रांतीय प्रतिनिधि डॉ. राजेश मलिक मौजूद रहे। मेक्टा के अध्यक्ष डॉ. विकास वशिष्ठ और महामंत्री डॉ. विरेंद्र कुमार की ओर से ज्ञापन दिया गया। शिक्षकों ने कॉलेजों की बोर्ड ऑफ स्टडीज और आरडीसी (रिसर्च डेवलेपमेंट कमेटी) का अधिकार कॉलेजों के शिक्षकोें को ही देने की मांग की। प्राइवेट छात्रों का परीक्षा केंद्र बनाने के मामले में कहा कि कॉलेज के एरिया के हिसाब से छात्रों की संख्या तय की जाए। अगर ज्यादा छात्र देने ही हैं तो सेल्फ फाइनेंस के शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई जाए। शिक्षक कल्याण कोष और भुगतान की जानकारी दी जाए। सेमेस्टर प्रणाली में इंटरनल एसेसमेंट खत्म करने की मांग की। रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों की विषमता दूर करने, स्पोर्ट्स में विशेष योग्यता रखने वाले छात्रों को दोबारा एडमिशन देने की व्यवस्था की जाए। ऐसा दूसरे विश्वविद्यालयों में हो रहा है। परीक्षा 42 दिन में खत्म की जाए। मूल्यांकन को केंद्रीय न कराकर जिला मुख्यालय पर केंद्र बनाकर कराया जाए। कहा दूरदराज से शिक्षक मूल्यांकन करने नहीं पहुंचते। शिक्षकों ने मूल्यांकन की गुणवत्ता पर सवाल भी खड़े किए। आरोप लगाया कि शिक्षक तय कॉपी से अधिक मूल्यांकन भी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा
रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। मेक्टा अध्यक्ष डॉ. विकास वशिष्ठ की ओर से मुख्यमंत्री को नामित ज्ञापन भेजा। यह मांग मूटा के सामने भी रखी, ताकि विवि के माध्यम से शासन तक पहुंचे।