शहर में प्राइवेट बसों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर आरटीए सचिव ने आरटीओ प्रवर्तन और एसपी सिटी को पत्र लिखकर बसों का संचालन बंद करने के निर्देश दिए हैं। बस आपरेटरों को भी नोटिस जारी कर दिए हैं। इससे बस आपरेटरों में हड़कंप मचा है।
29 जनवरी 2009 को हाईकोर्ट ने नगर बस योजना को रद कर दिया था। आदेश के बाद से आरटीओ ने बसों के परमिट नवीनीकरण करने तो बंद कर दिए थे, लेकिन बसों को शहर से बाहर नहीं था। बस आपरेटरों की परमिट नवीनीकरण की मांग को 30 अप्रैल 2012 को हुई आरटीए की बैठक में रखा गया था। किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए आरटीए ने आदेश पर विधिक राय लेने के लिए फाइल विधि विभाग के पास भेज दी थी।
अमर उजाला ने अवैध बसों के मामले को प्रमुखता से उठाया तो प्रशासन पर भी दबाव बना। 19 सितंबर 2014 को हुई आरटीए की बैठक में शहर में चल रही सभी बसों के परमिट निरस्त कर दिए गए। इसके खिलाफ आपरेटर स्टेट ट्रिब्यूनल में चले गए थे, जहां से एक आपरेटर के एक परमिट को राहत मिल गई थी।
इसी परमिट का हवाला देते हुए बस आपरेटरों ने 22 जुलाई को हुई आरटीए की बैठक में परमिट बहाल करने की मांग उठाई थी। लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई। नगर बस सेवा के परमिटों को निरस्त करने के आदेश का हवाला देते हुए मंगलवार को आरटीए सचिव ने आदेश जारी किया है। अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे प्राइवेट बसों का संचालन पूरी तरह बंद कराएं। पत्र की कॉपी एसपी सिटी के अलावा प्रशासन को भी भेजी गई है।
बस आपरेटरों को दी जानकारी
एआरटीओ प्रशासन एसएस सिंह ने बताया कि बस आपरेटरों को संचालन बंद करने का नोटिस जारी कर दिया है। मेरठ नगर बस सेवा यूनियन के अध्यक्ष हाजी इलियास का कहना है कि एक आपरेटर को स्टेट ट्रिब्यूनल के आदेश पर परमिट जारी हुआ है। बाकी आपरेटरों ने भी इसी आधार पर परमिट रिन्यू करने की मांग उठाई थी। लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। वे दिल्ली में हैं। शहर आने के बाद नोटिस और आदेश का अवलोकन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
शहर में दौड़ रहीं 45 बसें
एक समय था जब शहर में 140 नगर बस सेवा विभिन्न रूटों पर चला करती थीं, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद परमिट नवीनीकरण बंद होने से काफी बस बंद हो गईं। वर्तमान में कैंट स्टेशन, सिटी स्टेशन, कांशी और किठौर आदि रूटों पर करीब 45 प्राइवेट सिटी बस दौड़ रही हैं।