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सियासत: चंद्रशेखर के दांव से गरमाई राजनीति, तीन विधानसभा प्रभारियों की घोषणा के बाद समीकरण बदलने के संकेत

Sat, 01 Aug 2026 11:26 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

आजाद समाज पार्टी ने मेरठ शहर, किठौर और मेरठ कैंट के प्रभारियों का एलान किया। चंद्रशेखर आजाद के फैसले से 2027 विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नई नियुक्तियां प्रमुख दलों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती हैं।

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आसपा के नए चेहरे, बाबर खरदौनी, संजीव पाल, बदर अली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजाद समाज पार्टी कांशीराम (आसपा) ने शुक्रवार को 45 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों (बाद में प्रत्याशी बनाए जाते हैं) की घोषणा करके प्रदेश की राजनीति में गर्माहट ला दी है। मेरठ जिले की मेरठ शहर, किठौर और मेरठ कैंट सीट पर घोषित प्रभारियों के नामों से स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ी है। खासकर मेरठ शहर और किठौर विधानसभा सीटों पर सपा खेमे में खलबली मची हुई है। आसपा के घोषित प्रभारी चुनाव में सपा उम्मीदवारों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। इससे सीधा फायदा भाजपा को होने की उम्मीद है।

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आसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंकते हुए प्रभारी घोषित किए हैं। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी केंद्र मेरठ की तीन महत्वपूर्ण सीटों किठौर, मेरठ शहर और मेरठ कैंट पर खास फोकस किया गया है।
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इन सीटों पर मजबूत चेहरों को प्रभारी बनाकर जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है जो मुख्यधारा की पार्टियों के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। आसपा ने किठौर सीट पर बाबर चौहान खरदौनी, मेरठ कैंट पर संजीव पाल, मेरठ शहर पर बदर अली को प्रभारी बनाया है।

चंद्रशेखर आजाद - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
2027 के चुनाव पर असर
तीनों सीटों पर अलग-अलग समीकरणों के हिसाब से प्रभारियों का चयन करना स्पष्ट करता है कि आसपा इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केवल प्रतीकात्मक चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि हर सीट के मिजाज के मुताबिक मैदान में उतरेगी। अभी मेरठ की चार सीटों सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और मेरठ दक्षिण पर आसपा के प्रभारियों की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। 

चंद्रशेखर की हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने से बदलेंगे समीकरण
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मेरठ की हस्तिनापुर सुरक्षित सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। इससे हस्तिनापुर की राजनीति के समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं।  यहां से भाजपा के दिनेश खटीक दो बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। सपा से प्रभुदयाल वाल्मीकि, योगेश वर्मा आदि की दावेदारी भी चल रही है। यदि हस्तिनापुर से चंद्रशेखर आजाद चुनाव लड़ते हैं तो मेरठ, बिजनौर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के समीकरण बदल जाएंगे।

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बदर अली, आसपा - फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर सीट के चुनाव को प्रभावित करेंगे बदर अली
आसपा ने मुस्लिम समाज के बदर अली को मेरठ शहर सीट की जिम्मेदारी सौंपी है। मेरठ शहर सीट में मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य, जैन, पंजाबी, दलित समाज के मतदाता प्रभावी संख्या में है। दो बार से इस सीट पर सपा के रफीक अंसारी विधायक बन रहे हैं। 2017 में रफीक ने भाजपा के डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को और 2022 में भाजपा के कमलदत्त शर्मा को हराया था।

ऐसे में बदर अली के चुनाव लड़ने से सपा के चुनावी समीकरण प्रभावित होंगे। इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है। बदर अली के साथ मुस्लिम व दलित मतदाता अगर जुड़ते हैं तो वे एक नया समीकरण बना सकते हैं। बदर अली ने युवा सेवा समिति से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। 2023 के नगर निगम चुनाव में बदर अली की युवा सेवा समिति से पांच पार्षद भी चुनाव जीते। 2025 में खुद चंद्रशेखर ने बदर अली को आसपा में शामिल किया था।

बाबर खरदौनी, आसपा - फोटो : अमर उजाला
किठौर सीट पर बाबर खरदौनी से सपा खेमे में खलबली
किठौर में मुस्लिम, दलित, त्यागी, गुर्जर समाज के मतदाता हार-जीत तय करते हैं। आसपा ने बाबर चौहान खरदौनी को किठौर विधानसभा का प्रभारी बनाया गया है। किठौर के सपा विधायक शाहिद मंजूर से सियासी प्रतिद्वंदिता के चलते बाबर चौहान ने सपा छोड़कर आसपा का दामन थामा था। 2022 के चुनाव में सपा प्रत्याशी शाहिद मंजूर ने भाजपा प्रत्याशी सत्यवीर त्यागी से लगभग 2100 वोट के अंतर से ही चुनाव जीता था। 
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संजीव पाल, आसपा - फोटो : अमर उजाला
मेरठ कैंट सीट-संजीव पाल और सवर्ण-पिछड़ा-दलित संतुलन 
मेरठ कैंट जैसी भाजपा के प्रभाव वाली सीट के लिए आसपा ने संजीव पाल को प्रभारी बनाया है। मेरठ कैंट सीट पर पंजाबी, वैश्य, ब्राह्मण, दलित, क्षत्रिय मतदाता प्रभावी हैं। कैंट सीट पर संजीव पाल को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने दलित-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर अन्य समुदायों तक पहुंच बनाने का संदेश दिया है।
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