शिकायत में कहा गया कि पैनल बनाए रखने के लिए दोनों अधिकारियों ने 50 लाख रुपये की मांग की। रकम न देने पर रोहटा रोड स्थित जेएमसी मेडिसिटी हॉस्पिटल का पैनल निलंबित कर दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने चेतावनी दी कि रकम जल्द नहीं दी गई तो पेपला इदरीशपुर स्थित हाईफील्ड स्पेशलियटी हॉस्पिटल का पैनल भी निरस्त कर दिया जाएगा।
विशाल सलोनिया ने आरोपियों के साथ हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली और तीन दिन पहले सीबीआई के दिल्ली कार्यालय से संपर्क किया। सीबीआई ने शिकायत की पुष्टि के लिए कार्यालय की रेकी की और साक्ष्य जुटाने के बाद डॉ. अजय कुमार और लवेश सोलंकी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
सीबीआई के अनुसार, वसूली की रकम निजी कर्मचारी रईस अहमद के माध्यम से ली जाती थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मंगलवार को मेरठ में जाल बिछाकर तीनों को पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते समय गिरफ्तार कर लिया गया।
बुधवार दोपहर तीनों को सीबीआई ने गाजियाबाद अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की मांग की। सीबीआई ने कहा कि मामले की आगे जांच की जा रही है और बरामद दस्तावेजों की छानबीन करने के साथ ही पूछताछ की जानी है, इसलिए रिमांड दी जाए। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अलग-अलग कमरे में बैठाकर की पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम ने तीनों आरोपियों को कार्यालय में अलग-अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की। तीनों से टीम ने अलग-अलग गहन पूछताछ की। इसके बाद कार्यालय की तलाशी लेकर तमाम पत्रावली, कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क, दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए। पूछताछ के बाद टीम ने दोनों अफसरों के आवास की भी तलाशी ली। वहां से भी जरूरी दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए गए। डॉ अजय कुमार रुड़की रोड पर और लवेश सोलंकी का आवास गढ़ रोड स्थित मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में रह रहे हैं।