दो फाड़ हुआ बाजार : धरना और व्यापार साथ-साथ
बाजार में फूट की स्थिति दोपहर में ही स्पष्ट हो गई थी। एक तरफ जहां धरना चल रहा था वहीं ठीक सामने व्यावसायिक भूखंड पर बने कॉम्प्लेक्स में शोरूम और दुकानें खुली रहीं। इसे लेकर व्यापारियों के बीच जमकर गहमागहमी हुई। जानकारों का मानना है कि व्यापारियों की इसी आपसी फूट और गुटबाजी का खामियाजा बाजार को भुगतना पड़ रहा है जिसकी वजह से 661/6 का ध्वस्तीकरण हुआ।
बंद के ऐलान पर खींचतान और नेताओं की नाराजगी
शनिवार को सेंट्रल मार्केट में बुलाई गई आम सभा व्यापारियों के बीच आपसी तकरार का अखाड़ा बनी रही। मंच से बाजार को अनिश्चितकालीन बंद करने का ऐलान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 22 फरवरी के मेरठ आगमन के मद्देनजर 21 व 22 फरवरी को भी मेरठ बंद की घोषणा की गई।
बंद के इस फैसले पर संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता और पूर्व अध्यक्ष अरुण वशिष्ठ ने गहरा असंतोष जताया। वहीं शनिवार देर रात व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर से उनके आवास पर मिला। मंत्री के आश्वासन के बाद बंद को चार दिन के लिए टालने का फैसला लिया गया जिससे व्यापारियों के एक बड़े धड़े में आक्रोश फैल गया।