डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि युवा आजकल मोबाइल या कंप्यूटर जैसे उपकरणों पर इंटरनेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इनमें नकारात्मक चीजों पर ज्यादा समय व्यतीत करते हैं और अपनी पसंदीदा हस्ती को आदर्श मानते हैं। उनके व्यवहार, आदतों और जीवन शैली का अनुकरण करते हैं।
कई मशहूर हस्तियां स्वतंत्र रूप से शराब या नशीली दवाओं के उपयोग को स्वीकार करती हैं, जिससे युवा मस्तिष्क को यह धारणा मिलती है कि ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है। डॉ. नीलम गौतम ने बताया कि भारत में 15 से 29 आयु वर्ग सबसे अधिक असुरक्षित हैं।
इनमें लगभग पांच प्रतिशत आत्महत्या किसी सेलिब्रिटी की मृत्यु के बाद करते हैं। आत्महत्या अपने स्वयं के जीवन का जानबूझकर अंत करना है। यह मुख्य रूप से निराशा, अवसाद, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और विभिन्न व्यक्तिगत व वित्तीय तनाव कारकों की लगातार भावना के कारण किया जाता है।
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ऐसे करें आत्महत्या से बचाव
-आत्महत्या का विचार आए तो मदद मांगने में संकोच न करें।
-सोचें, हर समस्या का समाधान है, हिम्मत करें, तकलीफ साझा करें।
-सही दिनचर्या अपनाएं, अच्छा खाएं।
-अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं, खुलकर हंसे।
-अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
-नकारात्मक बातों, चीजों और लोगों से दूर रहें।
दबाव में टूट जाते हैं युवा
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि पढ़ाई का हो या नौकरी का, या फिर कोई और दबाव हो, युवा इसमें टूट जाते हैं, असफलता को सहन नहीं कर पाते। उन्हें आत्महत्या ही आसान उपाय नजर आता है। इससे बचने के लिए परिजनों और शिक्षकों को छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग करनी चाहिए। उन्हें यह एहसास कराना चाहिए कि कम अंक आना या किसी चीज में असफल हो जाना जीवन का अंत नहीं है। उन्हें बताएं कि यह तो सीख है आगे बढ़ने के लिए। जरूरत हो तो मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए।