ये न्यूनतम सुविधाएं होंगी
-चारा संग्रहण केंद्र
-विपणन केंद्र
-पानी के लिए तालाब
-एसटीपी का निर्माण
-रोड, नाली, पानी, पार्क, सीवर लाइन
-पशु चिकित्सालय, मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
अनुमानित खर्च
-विकास कार्यों पर अनुमानित खर्च 5.5 करोड़
- योजना विकसित करने में अनुमानित 18.07 करोड़
अनुमानित कीमत
-विक्रय योग्य भूमि- 13305 वर्ग मी.
-विक्रय योग्य भूमि की दर करीब 13582 रुपये प्रति वर्ग मी.एड0
मवाना रोड, गढ़ रोड, हापुड़ रोड व परतापुर रोड पर छोटी-छोटी कैटल कालोनी बनाएं। इनमें एमडीए जरूरी व्यवस्था करके सरकारी रेट पर दे। नंगलापातू में एमडीए छोटे-छोटे प्लाट पर कैटल कालोनी बना रहा है, जिसमें पशु बांधना संभव नहीं है। चूंकि शुरूआत हो रही है, इसलिए डेयरी संचालक प्लाट लेने के लिए तैयार हैं। करीब 70 डेयरी संचालकों के 10-10 हजार रुपये एकत्रित कर लिए हैं, जो एमडीए उपाध्यक्ष से वार्ता के बाद जमा करवाकर रसीद लेंगे। -महेंद्र सिंह उपाध्याय, अध्यक्ष डेयरी संचालक एसोसिएशन
वर्ष 1998 के शासनादेश का क्रियान्वयन 25 साल बाद 2023 में होना संभव है। सरकारी तंत्र की लापरवाही का खामियाजा डेयरी संचालकों को ज्यादा कीमत देकर चुकाना पड़ रहा है। 1040 में से शहर की 1015 डेयरियों के आवेदन एमडीए के पास पहुंच गए हैं, जिसके सापेक्ष सिर्फ 136 प्लाट ही विकसित किए जा रहे हैं। -लोकेश खुराना, सामाजिक कार्यकर्ता
डेयरी संचालकों के प्रतिनिधिमंडल को कैटल कालोनी पर बात करने के लिए मंगलवार को बुलाया गया है। बात के दौरान ही डेयरी संचालकों को जमीन की रेट से अवगत कराते हुए इच्छुक लोगों की सूची भी बनाई जाएगी। -अभिषेक पांडेय, उपाध्यक्ष एमडीए