आरोप है कि उन्होंने घर में घुसकर चेतन प्रकाश गर्ग के साथ मारपीट की। परिवार की बेटी का गलत नीयत से हाथ पकड़ा और छेड़छाड़ की। जब चेतन प्रकाश ने इसका विरोध किया तो उन्हें जबरदस्ती स्कार्पियो गाड़ी में डालकर ले गए।
यह था मामला...
हापुड़ कोतवाली पुलिस ने 27 अप्रैल की रात टीपीनगर निवासी चेतन प्रकाश गर्ग के मकान पर छापेमारी की थी। चेक बाउंस के मामले में उन्हें स्कार्पियो में लेकर जा रहे थे। मोहित गर्ग अपनी चाची के साथ पीछा कर रहे थे। घोसीपुर में कैंटर की टक्कर लगने से मोहित और उनकी चाची की मौत हो गई थी। इस मामले में शुक्रवार को भी तहरीर लिखी गई थी, लेकिन बाद में परिजनों ने दूसरी तहरीर देने की बात कही थी, जो शनिवार को दी गई।
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मोहित गर्ग के परिजनों की ओर से खरखौदा थाने में जो तहरीर दी गई है, उस पर केस दर्ज कर लिया गया है जबकि टीपीनगर थाने में दी गई तहरीर पर अभी जांच की गई है।
- कमलेश बहादुर, एसपी देहात
जांच के बाद हापुड़ पुलिस पर हो सकती है कार्रवाई
मेरठ में वारंटी व्यापारी प्रमोद गर्ग को उठाने गई हापुड़ पुलिस की टीम पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन जांच के बाद मामले में गाज गिर सकती है। चर्चा है कि पुलिस के साथ वादी के अलावा कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। मेरठ पुलिस चेतन प्रकाश के घर में बनाए गए वीडियो की जांच कर रही है। ऐसे में हापुड़ पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
प्रमोद गर्ग को पकड़ने गई हापुड़ पुलिस जमानती वारंटी उसके भाई चेतन प्रकाश को गाड़ी में लेकर आ रही थी। पुलिस के पीछेे आ रही उनकी पत्नी चित्रा व भतीजे मोहित गर्ग की स्कूटी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें दोनों की मौत हो गई। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से टीपीनगर और खरखौदा थानों में तहरीर दी गई है। मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो अभी तक जांच में सामने आया है कि हापुड़ से पांच पुलिसकर्मियों के अलावा उनके साथ वादी संजीव अग्रवाल व हापुड़ के रहने वाले कुछ लोग भी शामिल थे। ऐसे में जांच के बाद हापुड़ पुलिस के अलावा इन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। एएसपी मुकेश चंद मिश्रा का कहना है कि मेरठ पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कृत्य छिपाने के लिए पुलिस ने कराए सारे इंतजाम
दोनों शवों का शुक्रवार को ब्रजघाट में अंतिम संस्कार किया गया था। मृतकों के एक रिश्तेदार ने बताया कि हापुड़ पुलिस ने अपना कृत्य छिपाने के लिए ब्रजघाट पर पहले ही सारे इंतजाम कर दिए थे। टेंट लगाने के साथ चिताओं के लिए लकड़ी और पंडित की व्यवस्था भी थी। यह सब परिजनों को शांत रखने के लिए किया गया।