मुजफ्फरनगर निवासी सोनू उर्फ रोहित कश्यप की मौत के बाद मेरठ के ज्वालागढ़ गांव में हंगामा करने पर रिश्तेदारों और राजनीतिक दलों के लोगों समेत करीब 60 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन लोगों पर निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी एकत्र होकर हंगामा करने, पुलिस के साथ धक्कामुक्की समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
मेरठ के सरधना थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार उप निरीक्षक नितिन सारस्वत ने बताया कि बीते मंगलवार को सूचना मिली थी कि ज्वालागढ़ गांव में मदनमती पत्नी सोमपाल सिंह के घर पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हैं। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो रिश्तेदार इंद्रपाल पुत्र जगमत, उसके बेटे अंकित और गुड्डू सहित करीब 50 से 60 अज्ञात लोग मदनमती के घर पर एकत्र होकर भाषणबाजी और शोर-शराबा कर रहे थे।
पुलिस का कहना है कि मृतक सोनू उर्फ रोहित कश्यप जिला मुजफ्फरनगर के मोहल्ला किला हनुमान चौक का निवासी था। वहीं आरोपी इंद्रपाल के ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी में होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, जिले में निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद भीड़ एकत्र होने पर उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन लोगों ने पुलिस की बात नहीं मानी। स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस से धक्का-मुक्की की और अभद्रता की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
उधर इस मामले में सरधना थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में जिले में धारा 163 लागू होने का उल्लेख किया गया है, जबकि एसडीएम उदित नारायण सेंगर द्वारा कपसाड़ और ज्वालागढ़ गांव में धारा 163 लागू करने के निर्देश बुधवार रात को ही जारी किए गए थे। ऐसे में 13 जनवरी की घटना के संदर्भ में निषेधाज्ञा का हवाला दिए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हुआ, जिसमें सोनू उर्फ रोहित कश्यप हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए लोगों से मेरठ कमिश्नरी पहुंचने की अपील की गई है।