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यूपी: जनवरी माह के अंत तक मिल सकती है खुशखबरी, क्रांतिधरा से भर सकेंगे उड़ान

Fri, 04 Jan 2019 07:14 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हवाई उड़ान
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मेरठ में हवाई अड्डा निर्माण की तरफ धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ते जा रहे हैं। बहु प्रतिक्षित वन विभाग की जमीन भी भारत सरकार को हस्तांतरित हो गई है, जिसे शीघ्र ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को सौंप दिया जाएगा। हवाई अड्डा निर्माण के लिए अब 132 एकड़ जमीन की उपलब्धता हो गई है।

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डॉ. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी 46.77 एकड़ जमीन में बनी है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माण के लिए करीब 630 एकड़ जमीन की जरूरत है। लेकिन क्षेत्रीय उड़ान के लिए अब जमीन आधी ही लिए जाने का प्रस्ताव है। ऐसे में अब वन विभाग की जमीन भी हवाई अड्डा निर्माण के लिए मिल जाने के बाद कुल जमीन की उपलब्धता वर्तमान में करीब 132 एकड़ हो चुकी है। जिसमें क्षेत्रीय उड़ान शुरू की जा सकती है। जबकि किसानों से 503 एकड़ जमीन खरीदने पर भी अंतिम मसौदा साल 2014 में तैयार हो चुका था। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा पैसा उपलब्ध न कराए जाने के कारण यह जमीन नहीं खरीदी जा सकी थी। जबकि किसान आज भी उसी तय दर पर जमीन देने के लिए तैयार हैं।
 
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी इन दिनों मेरठ से हवाई उड़ान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। वाजपेयी ने बताया कि वन विभाग की जमीन भारत सरकार को हस्तांतरित करने का आदेश गुरुवार को जारी हो गया। उन्होंने इस आदेश की प्रति वन विभाग, जिलाधिकारी और हवाई पट्टी के स्थानीय प्रभारी को भेज दी है। वाजपेयी ने कहा कि उनका प्रयास शीघ्र ही मेरठ से हवाई उड़ान शुरू कराने का है, जिसमें 18 सीटर विमान तो जनवरी माह में ही मेरठ से उड़ान भर सकता है।

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वर्तमान में जमीन की उपलब्धता
हवाई पट्टी की जमीन 46.77 एकड़, एमडीए से ली गई कुल जमीन 50.99 एकड़, वन विभाग से ली गई 30.19 एकड़ है। जबकि कुछ किसानों से भी जमीन ली गई है। इन जमीनों के लिए एमडीए को जहां 52.89 करोड़ रुपये की धनराशि दी जा चुकी है, तो वन विभाग को 1.70 करोड़ की धनराशि दी जा चुकी है। वहीं, जिन किसानों से जमीन ली गई थी, उन्हें भी पैसा दिया जा चुका है। 

वन विभाग काटेगा अपने पेड़
वन विभाग ने सिर्फ जमीन बेची है, जिसका उसे 1.70 करोड़ रुपये मिला है। जबकि इस जमीन में खड़े 1152 पेड़ों का कटान वन विभाग कराएगा। इसके अलावा जब तक हवाई पट्टी पर हवाई अड्डा निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तब तक जमीन को प्रयोग करने वाला अपने खर्च से इस जगह पर पौधरोपण के साथ उसकी देखरेख भी करेगा। वहीं, यदि जमीन की वर्तमान दर में बढ़ोत्तरी होती है, तो उसका पैसा भी संबंधित विभाग वन विभाग को देगा।

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