दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध में लिसाड़ीगेट में जुमे की नमाज के बाद एक समुदाय के लोगों ने पुलिस पर हमला किया था। तिरंगा गेट के सामने इस्लामाबाद पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया गया था। उपद्रवियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी।
दरअसल, 20 दिसंबर 2019 को सीएए को लेकर प्रदेशभर में हिंसा हुई थी। लिसाड़ीगेट में जुमे की नमाज के बाद एक समुदाय के लोगों ने पुलिस पर हमला कर हिंसा कर दी थी। पुलिस-प्रशासन की ढीली कार्रवाई के चलते प्रदेश सरकार ने फटकार लगाई थी।
इसके बाद पुलिस एक्शन में आई और हिंसा और आगजनी में नष्ट हुई सरकारी संपत्ति की कीमत के तौर पर 28.27 लाख रुपये की वसूली के लिये 51 आरोपियों की संपत्ति नीलाम करने का नोटिस दिया गया था।
पांच लोगों की हुई थी मौत,173 बने थे आरोपी
लिसाड़ीगेट क्षेत्र और हापुड़ रोड पर हुई हिंसा में पांच लोगों की गोली लगने से मौत हुई थी। इस हिंसा में लिसाड़ीगेट, नौचंदी, ब्रह्मपुरी, मवाना, जानी, सरधना थाने में 23 मुकदमे दर्ज हुए थे।
इनमें 173 आरोपी नामजद हुए थे जबकि 76 आरोपी जेल भेजे गए थे। जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। अधिकांश मुकदमों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। सीएए की हिंसा में नामजद आरोपियों से वसूली करने के लिए शासन के आदेश पर प्रशासन ने संज्ञान लिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।