1994 में सरकार ने सेवा कर दी बंद
साल 1994 में नगर विकास विभाग ने नगर पालिका के समय संचालित की गई चारों डिस्पेंसरी को अयोग्य घोषित कर दिया। चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की तैनाती पर रोक लगा दी। पूर्व महापौर हरिकांत अहलुवालिया के बोर्ड में तो कई बार अस्पताल संचालन के लिए दवाइयों का बजट पास किया गया और चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन कोई पहल नहीं हुई।
बोर्ड में उठा मामला
निगम की डिस्पेंसरी चलाने का मामला कई बार बोर्ड में उठा है। हमने निजी स्तर पर भी नगरायुक्तों से बात की। अधिकारी शासन के आदेश का हवाला देकर जनता को मिलने वाली सुविधाएं देने से पल्ला झाड़ते रहे, जबकि निगम अपने खजाने से डिस्पेंसरी चला सकती है। - सुनीता वर्मा, महापौर
डिस्पेंसरी चालू करने पर करना चाहिए विचार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में जितनी सुविधाएं हो जाएं कम हैं। कोरोना के दौरान इन सुविधाओं का अहसास हुआ। शासन और नगर निगम को डिस्पेंसरी चालू करने पर विचार करना चाहिए। - डॉ. गजेंद्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी