कारखाना प्रभार के तहत शीतगृह खतरनाक श्रेणी में आता है। श्रम उपायुक्त रविंद्र कुमार ने निरीक्षण के लिए सहायक निदेशक कारखाना विवेक सारस्वत को भेजा। अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि शीतगृह का कारखाना प्रभार में पंजीकरण नहीं कराया गया था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिस कारखाने में 20 कर्मचारियों से अधिक होते हैं, उन्हें पंजीकरण कराना होता है। यहां कर्मचारियों की संख्या 27 से अधिक सामने आई है, ऐसे में पंजीकरण होना चाहिए था।
अनुभवहीन कर्मचारी भी हो सकते हैं वजह
सूत्रों के अनुसार, शीतगृह में रिसीवर टैंक से दी जाने वाली अमोनिया गैस की सप्लाई के समय गड़बड़ी हुई है। परिणामस्वरूप पहले पाइपलाइन और रिसीवर टैंक में धमाका होने से हादसा हुआ। अनुभवहीन कर्मचारियों के कारण भी हादसे की संभावना है। हालांकि संभावित कारणों की जांच अभी की जा रही है।
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सहायक निदेशक कारखाना को जन शक्ति कोल्ड स्टोर में जांच के लिए भेजा गया। सभी तथ्यों की गहनता से जांच की जा रही है। टीम हर पहलू पर गौर कर रही हैं। तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
- रविंद्र कुमार, श्रम उपायुक्त
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सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने पीड़ितों का हाल जाना
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने शनिवार को घायलों का मेडिकल कॉलेज में जाकर हाल चाल जाना। इस दौरान उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।