परिवार के लोगों ने भी हिस्ट्रीशीटरों के बारे में जानकारी से मना कर दिया। कुछ के बारे में बताया गया कि नौकरी या मजदूरी करने के लिए बाहर रह रहे हैं, लेकिन कहां है, इसका जवाब नहीं मिला। ऐसी स्थिति में भी पुलिस ने उन्हें लापता माना है। इतनी तादात में हिस्ट्रीशीटरों के लापता होने से पुलिस महकमा अब दोबारा से चेकिंग अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें पुलिस फिर से घर-घर जाकर इनकी जानकारी जुटाएगी। अगर कोई हिस्ट्रीशीटर बाहर भी रह रहा है तो चेकिंग के लिए उसने अपने घर पर रहना होगा।
वारदात के बाद कसा जाता है शिकंजा
यदि किसी क्षेत्र में चोरी, लूट या डकैती जैसी कोई वारदात होती है तो सबसे पहले उस क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों पर शिकंजा कसा जाता है। उनकी कुंडली खंगाली जाती है कि वह उस वारदात के समय कहां पर थे। वारदात में उनकी कोई भूमिका है या फिर नहीं। हिस्ट्रीशीटरों पर शिकंजा कसते ही काफी मामले खुल भी जाते हैं। इसलिए हिस्ट्रीशीटरों के बारे में संबंधित थाना पुलिस के पास पूरी जानकारी होना जरूरी है।
चेकिंग के दौरान जो हिस्ट्रीशीटर नहीं मिले थे, उनके लिए दोबारा से अभियान चलाया जाएगा। सभी थाना पुलिस को निर्देश हैं कि हिस्ट्रीशीटरों की हर जानकारी होनी चाहिए। यदि वह कहीं बाहर नौकरी या मजदूरी भी कर रहा है तो भी पूरा पता होना जरूरी है। - कमलेश बहादुर, एसपी देहात