मेरठ। मेडिकल स्टूडेंट्स को अब मरीजों के बीच काम करने के लिए एमबीबीएस पूरा होने यानी 4 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रवेश लेते ही उन्हें मरीजों के बीच काम करने का मौका मिलेगा। इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है, जो इसी सत्र (अगस्त) से लागू किया जाएगा।
नए पाठ्यक्रम के तहत मेडिकल स्टूडेंट्स को मरीजों को देखने और बातचीत करने का तरीका भी सिखाया जाएगा। चिकित्सा संस्थानों की ओर से इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। अब तक एमबीबीएस की पढ़ाई की शुरुआत थ्योरी पर आधारित होती थी, लेकिन अब इसमें प्रैक्टिकल भी विशेष रूप से जोड़ दिया गया है। मेडिकल स्टूडेंट्स को अंग्रेजी में बोलने और समझने का तरीका सिखाया जाएगा, उन्हें मरीजों के बीच काम करने का मौका मिलेगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि मेडिकल का नया पैटर्न बेहद कारगर साबित होगा। इससे स्टूडेंट्स का एक्सपोजर बढ़ेगा, वह सिर्फ थ्योरी तक ही सीमित नहीं रहेंगे।
विषय चुनने की भी होगी आजादी
मेडिकल के स्टूडेंट्स को विषय चुनने की भी आजादी होगी। कोई छात्र आंकोलॉजी पसंद करता है तो उसे एमबीबीएस के दौरान ही आंकोलॉजी में काम करने का मौका मिलेगा। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद छात्रों को कॉलेज परिसर के हर विभाग की जानकारी दी जाएगी।