मेडिकल कॉलेज में प्रसव पीड़ा के दौरान लावड़ निवासी मरीज को भर्ती न करने और खुले में हुए प्रसव से जुड़े मामले पर प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने जांच बैठा दी है। चार सदस्यीय कमेटी में डॉ. अभिलाषा गुप्ता, डॉ. विनय अग्रवाल, सीएमएस डॉ. विभु साहनी व मेटर्न को शामिल किया है। कमेटी इस मामले में चिकित्सा व पैरामेडिकल स्टाफ की तरफ से की गई लापरवाही से जुड़े हर पहलू की जांच कर रिपोर्ट देगी।
विवाद भी शुरू
कमेटी गठित होते ही आरोप लग रहे हैं कि जांच कमेटी में उन सदस्यों को शामिल किया गया है, जो स्वयं ही पहले दिन से मान रहे हैं कि इस मामले में गायनी वार्ड की कोई लापरवाही नहीं है। बल्कि मरीज ने पेपर पर साइन नहीं किया था। जिस कारण से महिला को भर्ती नहीं किया गया था। तर्क यह दिया था कि महिला के गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी और महिला एनीमिया की मरीज थी। ऐसे स्थिति में ऑपरेशन करते वक्त उसकी जान भी जा सकती थी।
लेकिन इसका जवाब नहीं
हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन उस सवाल का जवाब नहीं दे पा रहा है कि खुले में प्रसव होने के बाद बिना किसी पेपर पर हस्ताक्षर कराए कै से तत्काल महिला को भर्ती कर लिया गया था। वहीं, कहां जा रहा है कि जो सदस्य कमेटी में हैं, उनकी रिपोर्ट में कभी कोई नतीजा नहीं निकला है, बल्कि जांच ठंडे बस्ते में डालने के लिए ही दी गई है।