मेडिकल कॉलेज में मरीजों को एक्सरे कराने के लिए भी भटकना पड़ रहा है। विभाग में तीन माह से एक्सरे की बड़ी फिल्म खत्म हो गई, जबकि छोटी पर चुनिंदा लोगों के ही एक्सरे कराए जा रहे हैं। इससे परेशान मरीजोें को बाहर से एक्सरे कराने पड़ रहे हैं।
रेडियोलॉजी विभाग एक्सरे को चलाने के लिए बजट मांग रहा है, लेकिन अभी तक एक भी पैसा शासन से नहीं मिला है। पहले से खरीदी गई छोटी फिल्म पर ही मरीजों के एक्सरे किए जा रहे हैं। तीन महीने पहले एक दिन के अंदर करीब 150 एक्सरे हो पा रहे थे जो अब घटकर 50 से भी कम रह गए है। नाम न छापने की शर्त पर एक एक्सरे टेक्नीशियन ने बताया कि करीब 60 फीसदी मरीजों को लौटाना पड़ रहा है। हाथ, पैर व घुटने का एक्सरे ही छोटी फिल्म पर किया जा सकता है। जबकि छाती, कमर, पेट या फिर अन्य जगह का एक्सरे बड़ी फिल्म पर किया जा सकता है। वहीं बताया जा रहा है कि छोटी फिल्म सीमित ही बची है। यदि जल्द बड़ी फिल्म की व्यवस्था नहीं हुई तो तीन एक्सरे मशीन में से चल रही एक मशीन भी बंद हो जाएगी। हाल ही में खरीदी गई पोर्टेबल एक्सरे मशीन भी आज तक चालू नहीं हो पाई है।
मरीज काट रहे चक्कर
बड़ी फिल्म पर एक्सरे न हो पाने के कारण मरीज परेशान हैं। मरीजों को बाहर से ही एक्सरे कराकर लाना पड़ रहा है। जब तक एक्सरे कराकर आते हैं ओपीडी से डॉक्टर उठ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को अगले दिन फिर से आना पड़ता है। मेडिकल कालेज के पीआरओ डॉ. दिनेश राणा का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के सामने बजट की दिक्कत है, सरकार से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट मांगा गया है। जरूरी दवाओं की भी भारी किल्लत है। ऐसे में सरकार बजट दे देती है तो एक्सरे यूनिट को फिल्म उपलब्ध करा दी जाएगी।