मेडिकल कॉलेज में हर स्तर पर चल रही सुलह की कोशिशों ने आखिरकार मंगलवार देर रात दम तोड़ दिया। जिद पर अड़े जूनियर डॉक्टर कॉलेज प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने पर लखनऊ रवाना हो गए।
संभवत: बुधवार को शासन में यह मुद्दा उठ सकता है। उधर, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता भी सख्त हो गए हैं। उन्होंने देर रात ही सारे मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है।
जूनियर डॉक्टरों की मांग किस हद तक जाकर मानी गई और उसके बाद भी उनके अड़ियल रुख को लेकर विस्तृत रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक को भेज दी है।
प्राचार्य ने मंगलवार को कई बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सरकार ने न तो मेरे लिए और न ही जूनियर डॉक्टरों के लिए चलाया है। यह जनता के लिए है।
अभी तक तो आम मरीजों की समस्याओं और मेडिकल कॉलेज के हितों को देखते हुए जूनियर डॉक्टरों से बिल्कुल निचले स्तर तक जाकर वार्ता की गई। जहां तक ईएमओ डॉ. सचिन का सवाल है तो वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का स्टाफ हैं ना कि मेडिकल चिकित्सा शिक्षा का।
उन्हें सस्पेंड करने के पीछे तर्क होने चाहिए, जिसके लिए जांच बैठाई गई है। वो भी बिना किसी ठोस साक्ष्य के। ताकि किसी तरह से मामले को सुलझाया जा सके।
उसके बाद भी अगर कोई अड़ियल रुख अपनाए हुए है तो फिर क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कॉलेज हित में अब हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। किसी के साथ कोई सहानुभूति नहीं होगी।
हर छात्र की उपस्थित तलब
सारे फार्मूले फ्लॉप होने के बाद अब कॉलेज प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। देर रात ही हर विभाग वाइज जूनियर रेजीडेंट की उपस्थिति मंगा ली गई। अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की तनख्वाह काटने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है।
वहीं, एस्मा के तहत नोटिस पहले ही जारी कर दिया गया था। जिसमें कॉलेज प्रशासन ने अवगत कराया था कि एस्मा लगी हुई है, अगर कोई भी हड़ताल पर जाता है तो फिर उसके खिलाफ एस्मा के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब कॉलेज प्रशासन एस्मा के तहत कार्रवाई करा सकता है।
लड़ाई में पिसे मरीज
पूरे घटनाक्रम के बीच कॉलेज का बड़ा तबका मामले को निपटाने की कोशिश में लगा है तो वहीं जूनियर डॉक्टर विभागों से गायब हैं। बीते दिनों में ओपीडी में मामूली गिरावट आई है।
लेकिन प्रतिदिन होने वाली सर्जरी सीमित होकर रह गई है। हड्डी विभाग में कोई बड़ी सर्जरी नहीं हुई है। क्योंकि कई विभागों में जूनियर डॉक्टर अपनी उपस्थिति लगाकर गायब हो जा रहे हैं।
छात्र बैठे भूख हड़ताल पर
एमबीबीएस के छात्र अपने दिवंगत साथी संजीत सिंह को न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। मंगलवार रात जैसे ही जूनियर डॉक्टर लखनऊ जाने के लिए बस में सवार हुए तो दूसरी तरफ छात्रों ने कैंपस में भूख हड़ताल शुरू कर दी।
छात्रों का आरोप है कि जूनियर और सीनियर डॉक्टरों की लापरवाही से संजीत की जान गई है और अब उन लोगों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक कार्रवाई नहीं होती है, आंदोलन जारी रखा जाएगा।
अहम की लड़ाई में अपने दे रहे आग को हवा
मेडिकल कॉलेज के बिगड़ते हालातों के लिए अहम की लड़ाई को जिम्मेदार माना जा रहा है। कुछ अपने और पराये नहीं चाहते कि संजीत को न्याय मिले, सहमति से विवाद का पटाक्षेप हो और मरीजों को रूटीन से इलाज मिलना शुरू हो जाए।
स्वार्थ साधने की रणनीति के तहत आग को हवा दी जा रही है। इंटेलीजेंस रिपोर्ट ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि कुछ विशेष लोग माहौल को गरम रखना चाहते हैं ताकि शासन की नजर में मेडिकल कॉलेज प्रशासन अक्षम साबित हो जाए।
इंटेलीजेंस रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल कॉलेज प्रशासन में जो भी कुछ चल रहा है, उसके पीछे काफी कुछ गणित लगाया जा रहा है। कॉलेज के अंदर और बाहर बैठे कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि जूनियर डॉक्टर, एमबीबीएस छात्र और कालेज प्रशासन के बीच में समझौता हो और कालेज में मरीजों का इलाज सुचारु रूप से हो सके।
क्योंकि जितना मामला बढ़ेगा, उससे उनके हित सीधे होंगे। कालेज में प्राचार्य की कुर्सी पर भी कुछ लोगों की निगाहें हैं तो कुछ नहीं चाहते हैं कि प्राचार्य दोबारा से प्रमोशन लेकर लखनऊ में जाएं।
सूत्रों के मुताबिक इंटेलीजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि एमबीबीएस छात्रों से लेकर जूनियर डॉक्टरों को बैक डोर से उकसाया जा रहा है। शासन में यह संदेश जाए कि कॉलेज के हालात बेहद नाजुक हैं।
कॉलेज में प्रशासनिक व्यवस्था को संभाल रहे लोग व्यवस्था बनाए रखने में विफल साबित हो रहे हैं। इसलिए संजीत को न्याय दिलाने की लड़ाई अहम में तब्दील हो गई है।
प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता के त्रिस्तरीय फार्मूले को दरकिनार करते हुए जूनियर डॉक्टरों ने ईएमओ डॉ. सचिन को मुद्दा बना लिया है। मंगलवार रात तक चली वार्ता की हवा निकालते हुए जूनियर डॉक्टर लखनऊ के लिए रवाना हो गए तो एमबीबीएस छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए।
ईएमओ पर टिप्पणी से गरमाया माहौल
मंगलवार दोपहर एक कर्मचारी नेता ने एक वरिष्ठ ईएमओ को लेकर अभद्र टिप्पणी कर दी, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन का बड़ा तबका कर्मचारी नेता के खिलाफ हो गया।
कॉलेज की सीनियर फैकल्टी ने कर्मचारी नेता के खिलाफ कॉलेज कैंपस से लेकर डीएम कार्यालय तक मार्च निकालने का एलान कर दिया। उधर, जूनियर डॉक्टरों ने भी हंगामा शुरू कर दिया।
ऐसे में आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद स्थिति को संभाला गया। उधर, गुस्से में आए ईएमओ ने भी कहा कि कॉलेज में दो लोगों की वजह से माहौल बिगड़ रहा है।
इन दोनों को बाहर कर देना चाहिए। हालांकि कर्मचारी नेता को जैसे ही मामले की सूचना मिली तो उसने फोन कर ईएमओ से माफी मांगी, जिसके बाद जाकर माहौल शांत हुआ।