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मेडिकल कॉलेज बना टीबी मरीजों के इलाज का हब

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माई सिटी रिपोर्टर
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मेरठ। अब टीबी के मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंस (एमडीआर) मरीजों की जांच के लिए सैंपल आगरा की लैब नहीं भेजने पड़ेंगे। टीबी के मरीजों की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में लाइन प्रोब एस्सै (एलपीए) लैब शुरू की गई है। इसे मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों से जोड़ा जाएगा। 72 घंटे में रिपोर्ट आ जाएगी। आगरा के बाद पश्चिम उत्त्तर प्रदेश में यह दूसरी एलपीए लैब होगी। अभी तक दोनों मंडलों से हर माह 300 सैंपल जांच के लिए आगरा भेजे जाते थे।
बुधवार को विश्व क्षय रोग दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर से डिजिटल माध्यम इसका लोकार्पण किया। मेडिकल कॉलेज में विधायक सोमेंद्र तोमर ने इसका उद्घाटन किया। प्रधानाचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, उप अधीक्षक डॉ. दिनेश राणा और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार भी इस दौरान मौजूद रहे।
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मेरठ में एमडीआर के 235 मरीज
लैब प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि टीबी के मरीजों को मुख्यत: 13 तरह की दवाएं दी जाती हैं। एमडीआर के मरीज पर अगर दवा असर नहीं करती तो फिर उसकी जांच करनी पड़ती है। इससे यह पता चल जाएगा कि मरीज के लिए कौन सी दवा चलाई जाए। मेरठ में इस समय एमडीआर के 235 मरीज हैं। अभी तक मेडिकल कॉलेज में टीबी के लिए सीबी नाट, कल्चर एंड डीएसटी जांच की सुविधा उपलब्ध थी। अब विस्तृत जांच हो सकेगी।
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जिला क्षय रोग विभाग में डिजिटल एक्सरे भी शुरू
मुख्यमंत्री ने जिला क्षय रोग विभाग में डिजिटल एक्सरे की भी शुरुआत की। अभी तक टीबी के मरीजों को डिजिटल एक्सरे कराने के लिए मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल की लैब में भेजना पड़ता था। अब टीबी विभाग में ही यह जांच हो जाएगी। लगभग हर टीबी के मरीज को डिजिटल एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। इस दौरान जिला क्षय रोग विभाग में मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन रहे।
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तीन साल में 20 हजार से ज्यादा ने टीबी को मात दी
मेरठ। टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। बावजूद इसके हौसला हो और नियमित इलाज कराने पर यह बीमारी टिक नहीं पाती है। जिला क्षय रोग विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तीन साल में 20 हजार से अधिक लोगों ने टीबी को हराया है। 2018 में टीबी के 6703 ठीक हुए, 2019 में 7281 मरीज ठीक हुए, जबकि 2020 में 6051 ने टीबी को मात दी। टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहती है।
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टीबी के मरीजों को तीन वर्गों में चिह्नित कर इलाज किया जाता है। पहले वर्ग में नए या फिर एक माह से कम दवा खाने वाले मरीज होते हैं। उनका छह माह तक इलाज चलता है। दूसरे वर्ग में दो महीने तक दवाई खाने वाले मरीज होते हैं। उनका 9 महीने तक इलाज चलता है। वहीं, तीसरे वर्ग में एमडीआर मरीज का 24 महीने तक चलता है। एक दवा से रेजिस्टेंस होने पर 11 से 13 महीने तक दवाई दी जाती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।
ब्यूरो
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