मीट विक्रेताओं ने किया लाइसेंस के लिए आवेदन
बिजनौर जिले में मीट विक्रेताओं का कारोबार करना सपना ही न रह जाए। जिले में एक भी बूचड़खाना नहीं है। इसके चलते मीट विक्रेताओं के लाइसेंस बनने भी मुश्किल है। ऐसे में मीट व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मीट विक्रेताओं को लाइसेंस बनवाने के लिए कई गाइडलाइन पूरी करनी होगी।
प्रदेश में योगी सरकार बनते ही सरकार ने अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों पर रोक लगा दी थी, इससे मीट कारोबारियों में हड़कंप मच गया था। बिजनौर जनपद में नगरपालिका बिजनौर के मात्र 38 मीट विक्रेताओं ने ही पोर्टल पर लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन किया है, लेकिन आवेदन करने वाले 38 व्यापारियों का भी लाइसेंस बनना मुश्किल है। मीट विक्रेताओं को लाइसेंस बनवाने के लिए नगरपालिका, नगर पंचायत व सीओ सर्किल कार्यालय से एनओसी लेनी होगी। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से भी एनओसी लेनी होगी। मीट विक्रेता अगर अन्य जनपद के बूचड़खानों से मीट लाते है तो उन्हें मीट का श्रोत भी दिखाना होगा कि वह कहां से मीट ला रहे हैं और मीट को वह सिर्फ फ्रीजर वाली गाड़ी में ही अपनी दुकान पर ला सकते हैं।
मानक पूरे होने पर ही बनेगा लाइसेंस
अभिहित अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि नगरपालिका बिजनौर क्षेत्र से 38 मीट विक्रेताओं ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। उनका लाइसेंस तभी बनाया जाएगा जब वह मानक पूरा करेंगे। लाइसेंस बनने के बाद खाद्य विभाग के मानक का उल्लंघन होते ही तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। वहीं विभाग की ओर से मीट कारोबारियों को मानक बताने के लिए कैंप भी लगाए जा रहे हैं।