यही हाल रहा तो आगे आने वाले वर्षों में शहर में पार्किंग की सुविधा न होने से जाम की समस्या विकराल रूप ले लेगी। वहीं, नगर निगम की ओर से भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हर बार अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाता है लेकिन सड़क से एक इंच भी अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है। ऐसे में जाम और अतिक्रमण की समस्या शहरवासियों को यूं ही झेलनी पड़ेगी।
रैपिड और मेट्रो का किया बहाना
इसके लिए आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश कुमार खुराना ने शिकायत निवारण प्रणाली के अंतर्गत जवाब मांगा था। इसमें एमडीए ने लिखा है कि मल्टीलेवल पार्किंग के लिए न्यूनतम 18 मीटर चौड़े मार्ग पर एक हजार वर्ग मीटर भूमि की जरूरत है।
अभी इसके लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं, रैपिड और मेट्रो के शहर में आ जाने से जाम की समस्या खत्म हो जाएगी। ऐसे में एमडीए रैपिड और मेट्रो का बहाना बनाकर खुद पल्ला झाड़ रहा है। इससे साफ है कि एमडीए के पास खुद कोई प्लानिंग नहीं है।
टाउन हॉल में बना था प्रस्ताव
शहर में कई वर्षों पहले घंटाघर स्थित टाउन हॉल में पार्किंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। वहीं, एक वर्ष पहले तत्कालीन एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय और नगरायुक्त ने भी संयुक्त निरीक्षण कर नगर निगम परिसर में भी मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन एक भी स्थान पर अभी तक रूपरेखा भी तैयार नहीं हो सकी है।