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पार्क में लावारिस फेंकीं जमा रकम की पर्चियां

Tue, 29 Mar 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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आवंटियों द्वारा जमा किए धन की रसीदें दिखाते जागरूक नागरिक। - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ विकास प्राधिकरण से लिए गए मकानों की किश्तें आवंटी भले ही समय से जमा कर रहे हों पर एमडीए कर्मचारियाें का इससे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने बैंक की उन रसीदों को एमडीए परिसर के पार्क में लावारिस फेंक दिया, जिनमें आवंटियों ने रकम जमा की थी। बाद में हंगामा मचा तो कर्मी दौड़े और इन रसीदों को उठाकर भीतर ले गए।
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एमडीए ने विभिन्न योजनाआें में आवास और भूखंडों का आवंटन किया है। उनकी किश्त स्थानीय परिसर स्थित इलाहाबाद बैंक की शाखा में जमा होती है। एक पर्ची आवंटी अपने पास रखता है तो एक बैंक। तीसरी पर्ची एमडीए में जमा होती है। यह पर्ची आवंटी की मूल फाइल में चस्पा की जाती है ताकि जब उसका फाइनल भुगतान हो जाए तो उसकी रजिस्ट्री की जा सके।

अपने ही पार्क में फेंकीं पर्चियां
सोमवार को एमडीए परिसर स्थित पार्क में एमडीए कर्मचारियों ने दो मेजें लाकर रखीं। इनकी दराजों में ये रसीदें भरी थी। पार्क में रखते ही दराजें खुल गई तो उनमें भरी पर्चियां बिखर गई, पर एमडीए कर्मचारियों ने उन्हें समेटने की जहमत नहीं उठाई। इनमें सभी योजनाओं की रसीदें थी, पर गंगानगर के आवासों की किश्तों की पर्चियां सबसे ज्यादा थीं। लोगाें ने यह देखा तो उन्हें उठाकर ले जाने लगे। मेरठ नागरिक अधिकार मंच के संयोजक पंकज शर्मा ने भी पर्चियां उठाई और एमडीए परिसर में अधिकारियों के पास ले गए। उधर, जब मीडियाकर्मी वहां पहुंचे तो हंगामा मच गया। एमडीए कर्मी आनन-फानन में इन मेजों तथा पर्चियों को समेटकर भीतर ले गए।
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पहले भी हुई गड़बड़ी
ऐसा कई बार हुआ है कि जब आवंटी के जमा धन का हिसाब एमडीए की फाइल में नहीं मिला। आवंटी के पास यदि पर्ची है तो मिलान हो गया, नहीं तो उसे बैंक के चक्कर लगाने पड़े। यानी इसी तरह से पर्चियां लावारिस फेंकी गई और गड़बड़ी हुई।

कोट
हालांकि जमा रसीद की एंट्री तत्काल कंप्यूटर में हो जाती है, लेकिन ये पर्चियां जिन कर्मचारियों की लापरवाही से फेंकी गई है, उसका पता लगाकर एक्शन होगा। -राजेश कुमार वीसी एमडीए 
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