एनजीटी में चल रहे रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने के मामले का पटाक्षेप करने के इरादे से बुलाई गई एमडीए वीसी की बैठक काफी हंगामेदार रही। बैठक में याचिकाकर्ता लोकेश खुराना और रोडवेज अधिकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। बाद में रोडवेज अधिकारियों ने कोर्ट में लगाए गए हलफनामे में बस अड्डे के लिए मांगी गई 200 एकड़ जमीन में सुधार करने और एमडीए द्वारा उपयुक्त जमीन मुहैया कराने पर शहर से बाहर जाने को तैयार रहने की बात कही। वीसी ने 25 सितंबर को दोनों पक्षों की फिर से बैठक बुलाई है।
शहर में जाम व प्रदूषण का पर्याय बने रोडवेज बस अड्डों को बाहर करने का प्लान एमडीए ने मास्टर प्लान में किया था, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। मामले के विरोध में आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने एनजीटी में रिट फाइल कर रखी है। कोर्ट में राज्य सरकार को छोड़कर अन्य सभी विभागों ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। 21 सितंबर को हुई सुनवाई में एनजीटी ने मामले में 17 अक्तूबर की तिथि लगाई है। मामले का पटाक्षेप कोर्ट से बाहर करने के इरादे से एमडीए वीसी ने बृहस्पतिवार को याची लोकेश खुराना, डॉ. आरएन पाठक समेत रोडवेज अधिकारियों को अपने आफिस में वार्ता के लिए बुलाया था। दोपहर एक बजे शुरू हुई बैठक में लोकेश खुराना ने रोडवेज द्वारा बस अड्डों के लिए 200 एकड़ जमीन की मांग करने का हलफनामा एनजीटी में दाखिल करने की बात कहते हुए वीसी से पूछा कि क्या बस अड्डे के लिए इतनी जमीन की आवश्यकता होती है। इतनी जमीन में तो एयरपोर्ट बन जाता है। यह बात सुनकर रोडवेज अधिकारी उखड़ गए और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। खुराना ने कहा कि मामला कोर्ट में होने के बावजूद बस अड्डे पर निर्माण चल रहा है। इसके लिए एमडीए नेे भी परमिशन नहीं दी है। रोडवेज ने शासन का हवाल देते हुए सीएम द्वारा बस अड्डे के निर्माण की स्वीकृति देने की बात कही। मामले में कोई बात बनती नहीं देखकर वीसी ने अब सभी को आगामी 25 सितंबर को फिर से बुलाया है।