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छह अगस्त से होने वाली एमडी-एमएस की परीक्षाएं टली, 13 अगस्त से होने वाली परीक्षाओं पर भी संशय

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छह अगस्त से होने वाली एमडी-एमएस की परीक्षाएं टली, 13 अगस्त से होने वाली परीक्षाओं पर भी संशय
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मेरठ। सीसीएसयू से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस, डिप्लोमा-डीएम की छह अगस्त से होने वाली परीक्षाओं को टाल दिया गया है। एक सेंटर पर सिर्फ 110 छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं होनी थीं। परीक्षा टाले से छात्रों में नाराजगी है। उनका कहना है कि इतने कम छात्रों की परीक्षाएं सोशल डिस्टेसिंग के साथ आसानी से कराई जा सकती थीं।
31 अगस्त तक कॉलेजों को बंद किए जाने के निर्देशों पर यह परीक्षा टाली गई है, वहां सवाल ये है कि 20 मार्च के बाद से कॉलेज खुले ही कहां हैं। विवि कैंपस के प्रशासनिक कार्यालयों को छोड़ दें तो सबकुछ बंद है। वैसे भी इन परीक्षाओं को लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में कराया जाना था। वहां के प्रोफेसर भी परीक्षा कराने की मांग कर रहे थे। जिस तरह से विवि प्रशासन ने मेडिकल कोर्सों की परीक्षाओं को टाला है, उसको देखते हुए 13 अगस्त से होने वाली परीक्षाएं भी आसान नहीं लग रही हैं। जब एक केंद्र पर महज 110 छात्रों की परीक्षा को ही टाल दिया गया है तो फिर नौ जिलों के 214 केंद्रों पर 1 लाख 90 हजार छात्र-छात्राओं की परीक्षा कैसे हो पाएंगी। शासन की गाइड लाइन पर छात्र घनचक्कर बने हैं। न परीक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट है न ही ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर। सपा छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष सम्राट मलिक का कहना है कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर कुछ नहीं सोच रही है। जब परीक्षाएं कराने का माहौल नहीं है तो क्यों कराया जा रहा है। इसमें देरी के कारण वैसे ही छात्रों का बड़ा नुकसान हो रहा है। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रोहित राणा का कहना है कि अगर एक भी छात्र परीक्षा के कारण संक्रमित हुआ तो उसकी जिम्मेदार कौन लेगा।
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नाराज जूनियर डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन
परीक्षा निरस्त करने पर मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। साथ ही डॉ. विनय कुमार, डॉ. शशांक, डॉ. आमोद, डॉ. मोहित, डॉ. यशवीर, डॉ. प्राची और डॉ. प्रणव सीसीएसयू के वीसी से मिले। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि एग्जाम न होने से उनका मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कोविड-19 में प्रशिक्षित डॉक्टर्स की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमडी, एमएस और डीएम एग्जामिनेशन की नई तारीख जल्द से जल्द निर्धारित होनी चाहिए और परीक्षा फॉर्म को यथाशीघ्र अपलोड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे सैद्धांतिक परीक्षा के 4 पेपर होते हैं जिन्हें हमारे कॉलेज के सारे नियम का पालन करा कर कराया जा सकता है। वे 100 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर हैं। बाकी जिलों में एग्जाम हो रहे हैं।
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अब शिक्षक भी कर रहे बीएड प्रवेश परीक्षा का विरोध
मेरठ। नौ अगस्त को प्रस्तावित बीएड प्रवेश परीक्षा का छात्रों के बाद अब शिक्षक नेताओं ने भी विरोध शुरू कर दिया है। मूटा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विकास शर्मा ने उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर बीएड प्रवेश परीक्षा को स्थगित कर इस बार मेरिट से एडमिशन देने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि पांच लाख के करीब छात्र-छात्राओं ने फार्म भरे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। ऐसे में उनके अभिभावक भी साथ में आते हैं। यानी नौ अगस्त को पांच लाख की नहीं 10 लाख लोगों की कोरोना महामारी से बचने की भी परीक्षा होगी। अकेले मेरठ में ही 20 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। ऐसे में संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच परीक्षा उचित नहीं है। वैसे भी हर बार बीएड में काउंसिलिंग के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे मेें मेरिट से एडमिशन दिए जाएं तो बेहतर होगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र कुमार पांडेय ने भी लखनऊ विवि के कुलपति से परीक्षा रद्द कराने की मांग की है।
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