कान्हा के शृंगार के लिए सज गए बाजार
मेरठ। नंद के घर आनंद होने में बस चंद दिनों का इंतजार है। रक्षाबंधन का पर्व संपन्न होते ही घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। रक्षाबंधन से आठवें दिन भाद्रपद की अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। शहर के बाजार में बांसुरी, झूले, बिछौने और कान्हा की पोशाक सज चुकी हैं। लोग खरीदारी में भी जुट गए हैं। हालांकि कोरोना काल में बाजार में इस बार प्रभु के शृंगार के नए आइटम नहीं हैं।
बालगोपाल के लिए मोरपंखी मुकुट, पीतांबरी, पालना, बिस्तर, मखमली बिछावन, तकिया, मच्छरदानी, काठ और नग जड़ित जूतियां, फूलों और मोरपंखों की मखमली महंगी पोशाक, पूजा के बर्तन, घंटी, सिंहासन, चरणपादुका, पगड़ी, बांसुरी, तिलक, कुंडल, कंगन, पायल, करधन, बांसुरी का पूरा शृृंगार बाजार में उपलब्ध है। शहर में आबूलेन, सदर, बुढ़ाना गेट, सेंट्रल मार्केट, पीएल शर्मा रोड सहित अन्य सभी बाजारों में जन्माष्टमी के लिए डिसप्ले शुरू हो चुका है।
गर्मी से बचाने का पूरा इंतजाम
श्रीकृष्ण का बालरूप श्रद्धालुओं में सबसे अधिक प्रिय और पूजा जाने वाला रूप है। लोग इस रूप को विष्णु की तरह दुलारते और लाड़ लड़ाते हैं। नन्हे कन्हैया को गर्मी से बचाने के लिए छोटा कूलर, पंखा है। कॉटन का प्रिंटेड सूट, धोती कुर्ता और नाइट सूट है।
मनमोहक खेल-खिलौने
कान्हा के साथ खेलने के लिए उनके ग्वाले, संगी, साथी हैं। राधारानी के बालरूप के साथ मुरली मनोहर संग खड़ी नवयौवना राधा हैं। पंचधातु, अष्टधातु व पीतल में लड्डू गोपाल, राधा-किशन, मुरली बजाते कृष्ण व राधा की मूर्तियां हैं। जीरो नंबर से लेकर बडे़ आकार में ये मूर्तियां उपलब्ध हैं। सजावटी व साधारण मूर्तियों दोनों की विशेष मांग है। कान्हा के संग खेलने के लिए खिलौनों में हाथी, घोड़ा, पक्षी, झूला और खिलौने, नहाने का टब, पिचकारी, टेबिल टेनिस, गेंद बल्ला भी श्रद्धालु खरीद रहे हैं।
मोरपंख की जड़ाऊ पोशाकें उपलब्ध
आर्टिका सेंटर के संचालक अतुल गुप्ता का कहना है कि लॉकडाउन के कारण इस बार बाहर से कोई नया माल नहीं आ पाया है। कारीगरों से भी नया माल अधिक नहीं बन पाया है। इसलिए कोई नया आइटम इस बार बाजार में नहीं है। मोती, मोरपंख की जड़ाऊ पोशाकें व गहने हैं।