तीन माह में 70 प्रतिशत घट गया मंडी कारोबार, 20 प्रतिशत व्यापारियों का मंडी से पलायन
मेरठ। कृषि अध्यादेश लाए जाने के बाद से ही मंडी कारोबार में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। मंडी के बाहर कोई शुल्क न होने के कारण 20 प्रतिशत मिल संचालकों और थोक व्यापारियों ने कोराबार को मंडी के बाहर अपने गोदामों में शिफ्ट कर लिया है। ऐसे में 80 प्रतिशत व्यापारियों का कहना है उनके पास मंडी में व्यापार चलाने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में व्यापारी लगातार मंडी शुल्क समाप्त करने की मांग पर अड़े हैं।
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष एवं नवीन मंडी व्यापारी नवीन गुप्ता ने कहा कि नवीन मंडी में प्रतिदिन 5 करोड़ के आसपास कारोबार होता है। इसमें प्रमुख कारोबारी मिलर या मिल चलाने वाले हैं। ऐसे में इन व्यापारियों की शहर के बाहर मिल भी संचालित हैं। कृषि अध्यादेश आने के बाद बहुत से व्यापारियों ने मंडी के बाहर से कारोबार शुरू कर दिया है। मंडी में एक प्रतिशत पर कारोबार होता है। इन हालातों मंडी में बैठकर काम कर पाना असंभव है। ऐसे में बीते तीन माह में करीब 70 फीसदी कारोबार घट गया है। गल्ला मंडी एसोसिएशन के महामंत्री गिरीश अग्रवाल ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद कारोबार बहुत घट गया है। वहीं कृषि अध्यादेश के कारण भी मंडी का कारोबार घट गया है और दलहन, तिलहर, फल और सब्जी सभी के भाव में बहुत तेजी आ गई है।
36 साल पहले हुई थी मंडी की स्थापना
शहर की विभिन्न मंडी जिसमें साबुन गोदाम मंडी, सदर दाल मंडी, शहर दाल मंडी, शहर अनाज मंडी, सदर अनाज मंडी को जोड़कर दिल्ली रोड पर वर्ष 1984 के आसपास नवीन मंडी की स्थापना की गई थी। शहर के 500 के आसपास फल, सब्जी व गल्ला व्यापारी 36 वर्षों से यहां कारोबार कर रहे हैं। हालांकि मेरठ गल्ला मंडी में किसान सीधा माल बेचने के लिए नहीं आता है। व्यापारी अन्य प्रदेशों और जिलों से आवश्यकता अनुसार दलहन, तिलहर मंगवाकर कारोबार करते हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में आई गिरावट
दिल्ली रोड स्थित नवीन मंडी के सचिव नरेंद्र कुमार का कहना है कि बीते वर्ष की तुलना में मंडी का कारोबार 70 प्रतिशत तक घट गया है। इसके पीछे कारण कोरोना महामारी भी हो सकता है। व्यापार को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मंडी समिति व्यापारियों का हर तरह से सहयोग कर रही है।