500 और 1000 के नोट चलन से बाहर होते ही बाजार में मायूसी छा गयी। दिन भर इन दोनों नोटों को चलाने के लिए शहर के हर बाजार में जद्दोजहद होती रही। प्रमुख बाजारों, मंडियों और पेट्रोल पंपों पर इन नोटों को न लेने पर बहस और हंगामा होता रहा। शहर में दिन भर के घटनाक्रम पर रिपोर्ट।
पेट्रोल पंप पर ज्यादा मुसीबत
पेट्रोल पंपों पर ज्यादा बुरा हाल रहा। चौपहिया वाहन मालिकों को तो ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन दोपहिया, टेंपो या थ्रीव्हीलर जैसे वाहन वालों को पंप के सेल्समैनों ने साफ कह दिया कि पूरे 500 का तेल डलवाओगे तो तभी यह नोट लूंगा। जिसको लेकर नोकझोंक और मारपीट तक की नौबत आ गई।
कोट
- मुझे बाइक में 100 रुपये का तेल डलवाना था। लेकिन पंप के सेल्समैन ने 500 का नोट लेने से मना कर दिया। मुझसे कहा कि पूरे 500 का तेल डलवाओगे तो यह नोट लूंगा। मैंने कहा कि 200 का तेल डाल दे। लेकिन उसने मना कर दिया। - राहुल, बागपत रोड
- हमारे सभी पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल उपलब्ध है। 500 और 1000 के नोट से डीजल व पेट्रोल दिया गया है। खुले रुपयों को लेकर कुछ पंपों पर दिक्कतें आयी हैं। जनता को भी संयम से काम लेना चाहिए।- राकेश जैन, अध्यक्ष पेट्रोल पंप एसोसिएशन
गल्ला मंडी आधी खुली, आधी बंद
नवीन गल्ला मंडी में बंद का मिलाजुला असर रहा। जहां थोक दाल, चावल, घी, तेल, मूंगफली आदि व्यापारियों ने अपनी कुछ दुकानें बंद रखीं तो कुछ ने आधा शटर खोलकर पुराने ग्राहकों को उधार में और 100 के नोट पर माल बेचा। 500 और एक हजार का नोट बंद होने पर नवीन मंडी में एक ही दिन में लगभग 80 प्रतिशत कारोबार को प्रभावित हो गया।
- हमने गल्ला मंडी बंद नहीं की। या तो अपने पुराने ग्राहकों को उधार में चावल, दाल, तेल आदि का कारोबार कर रहे हैं या फिर 100-50 रुपये नोट देने वालों से व्यापार कर रहे हैं। बाकी 500 या 1000 के नोट को नहीं ले रहे हैं। क्योंकि सरकार ने बड़े नोटों का चलन बंद कर दिया है। सरकार अलग कोई आदेश देगी तो उसका पालन करेंगे।- महेंद्र गर्ग, दाल-चावल थोक व्यापारी।
सब्जी- फल मंडी में तकरार के साथ कारोबार
दिल्ली रोड स्थित फल और सब्जी मंडी में बुधवार को थोक और फुटकर कारोबार तो हुआ। लेकिन 500 और 1000 के नोट के चलन को लेकर तकरार होती रही। इस स्थिति में दोनों मंडियों में 50 प्रतिशत कारोबार को फटका लग गया। हालांकि व्यापारियों ने सब्जियों और फलों को खराब होने से बचाने के लिए 1000 व 500 रुपये का नोट लिया भी। वहीं फुटकर फल और सब्जी व्यापारियों ने जहां आढ़तियों से सामान खरीदते समय 500-1000 के नोट दिए तो 100 का नोट भी काफी चलन में रहा। आम लोगों को भी काफी परेशानी हुई
हम 500 का नोट ले तो रहे हैं। लेकिन जो ग्राहक 200 रुपये की सब्जी खरीद रहा है उसे 300 रुपये कहां से वापस दें। इस दिक्कत से व्यापार पर फर्क पड़ा है।- संजू, आढ़ती सब्जी मंडी
गैस डिलीवरी पर भी संकट
बड़े नोटों पर ब्रेक का असर गैस सप्लाई पर भी साफ दिखाई दिया। 500 का नोट थमाए जाने पर हॉकर और ग्राहक में बहस हो गई। होम डिलीवरी भी 30 प्रतिशत हो सकी। जिसका असर जनता की रसोई गैस पर भी दिखाई दे रहा है।