सड़क खोदकर 21 दुकानों की मार्केट बनाने की तैयारियों पर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने ग्रहण लगा दिया है। सरस्वती लोक कॉलोनी के सामने माधवपुरम मार्ग पर अवैध रूप से खोद डाली गई सड़क की जांच को उन्होंने आवास विकास अधिकारियों और एडीएम सिटी से मौके पर भेजकर जांच रिपोर्ट मांग ली। कमिश्नर का कहना है कि इस पर न केवल इस काम को अंजाम देने वाले लोगों पर एक्शन होगा, बल्कि नगर निगम, आवास विकास अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होगी।
नूरनगर रोड सरस्वती लोक के सामने से माधवपुरम की तरफ डिवाइडर रोड है। एक सप्ताह पूर्व एक साइड को कुछ लोगों ने खोदकर दीवार लगाने की तैयारी शुरू कर दी। लोगों ने सड़क पर अवैध कब्जा करने की शिकायत थाना ब्रह्मपुरी को दे दी। लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। लोगों का आरोप है कि सड़क से सटा एक बड़ा भूखंड है, जिसकी चारदीवारी करने वालों ने सड़क तक की जमीन पर कब्जा किया है। यहां लगा विद्युत खंभा तक बाउंड्री के भीतर ही आ गया है। उधर यह रोड भी खोदकर यहां बड़ी दुकानें बनाने की तैयारी है। हैरत की बात यह है कि 12 साल से यह मार्ग चल रहा है। लेकिन अब अचानक खोद दिया गया। बिल्डर भले ही इसे अपनी जमीन बता रहे हो। लेकिन है तो यह सड़क ही। इसे कैसे खोदकर मार्केट बनाई जा सकती है। बिल्डर ने न केवल इसे तोड़ डाला बल्कि यहां 21 दुकानें बनाने की तैयारी है। 10 से 15 लाख रुपये में दुकान बुक करने की बात भी कही जा रही है।
बुधवार को हुआ एक्शन
इस मामले में बुधवार को कुछ महिलाओं ने मंडलायुक्त से शिकायत कर दी। इस पर उन्होंने आवास विकास विभाग के अधिकारियों तथा एडीएम सिटी मुकेश चंद्र को मौके पर भेजकर इस बाबत पूछा तो सारा खेल स्पष्ट हो गया। कमिश्नर ने तत्काल काम बंद कराने को कहा, जिस पर काम रोक दिया गया।
पुलिस वाले भी नपेंगे
दरअसल जहां यह रोड खोदी गई है उसके नुक्कड़ पर पुलिस चौकी भी है। मंडलायुक्त का कहना है कि पुलिस चौकी होते हुए वहां रोड कैसे खोद दी गई? चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने इस बाबत आला अधिकारियों को क्यों नहीं बताया? उन्होंने इन सभी पुलिसकर्मियों की लिस्ट मांगी है जो इस चौकी पर तैनात हैं। सभी पर एक्शन की बात कही जा रही है।
सड़क खोदने वाले कागज जुटा रहे
सड़क खोदने वाले कागज जुटा रहे हैं। जैसे उन्होंने निगम से यह पत्र लिया है कि यह जमीन निगम की नहीं है। तहसील एनओसी से ली है कि यह जमीन सरकारी नहीं है। भले ही यह कागज जुटाएं जा रहे हो। लेकिन जमीन तो सड़क की है। उसे भला कैसे बदला जा सकता है। मंडलायुक्त का भी यही कहना है कि सड़क को कैसे तोड़ दिया?